प्रधानमंत्री मोदीजी ने पूर्वोत्तर को भारत सरकार की हर योजना में केन्द्र में रखकर काम किया : अमित शाह

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अंतर्राज्य छात्र जीवन दर्शन (SEIL)

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 11 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में अंतर्राज्य छात्र जीवन दर्शन (Student Experience in Inter-State Living) द्वारा आयोजित ‘उत्तर-पूर्व छात्र एवं युवा संसद (North-East Students’ & Youth Parliament)’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।

अपने संबोधन में श्री शाह ने कहा कि विपुल प्राकृतिक संपदाओं से भरे हुए हमारे उत्तर-पूर्व का आज़ादी से पहले भारत की जीडीपी में 20 प्रतिशत से अधिक योगदान था, जो आज घटकर 7 प्रतिशत से नीचे आ गया है। उन्होंने कहा कि हमारे नॉर्थ-ईस्ट में पूरी दुनिया को पर्यटन की दृष्टि से आकर्षित करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में भारत के सबसे ज़्यादा आईक्यू वाले युवा हैं और सबसे मेहनती जनजातियां यहीं हैं। श्री शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य गहना है और ये क्षेत्र भारत की संस्कृति को अति समृद्ध करने वाली विरासतों से लैस है। उन्होंने कहा कि यहां 220 से अधिक जनजातीय समूह हैं, 160 से अधिक जनजातियां निवास करती हैं, 200 से अधिक बोलियां और भाषाएं हैं, 50 यूनिक प्रकार के त्योहार हैं और पूरी दुनिया में प्रसिद्ध 30 से अधिक नृत्य शैलियां हैं। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में 78 से अधिक यूनिक वाद्य यंत्र हैं और 100 से अधिक अलग-अलग परिधान हैं।

पूर्वोत्तर को प्राथमिकता

श्री शाह ने कहा कि जब भी हमारी पार्टी की सरकार आई हमने पूर्वोत्तर को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि पहले इतने बड़े और पिछड़े भूभाग के लिए कोई अलग मंत्रालय नहीं था, लेकिन अटलजी की सरकार में इसकी स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर को भारत सरकार की हर योजना में केन्द्र में रखकर काम किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि नॉर्थ-ईस्ट और भारत के बाकी भागों के बीच की दूरी को कम कर दिया। श्री शाह ने कहा कि उत्तर-पूर्व के हर राज्य की राजधानी 2027 तक रेल, हवाई मार्ग और सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदीजी ने न सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ाकर उत्तर-पूर्व को भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ा, बल्कि फिज़िकल दूरी के साथ-साथ दिलों की दूरियां मिटाने का काम भी किया।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हर योजना के केन्द्र में पूर्वोत्तर को रखकर और एक के बाद एक वहां के हर उग्रवादी समूह से चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुन, समझ और उनके साथ समझौते कर उन्हें मेनस्ट्रीम में लाने का काम किया। उन्होंने कहा कि 10 साल में उत्तर-पूर्व आज शांति का अनुभव कर रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच नॉर्थ-ईस्ट में 11 हज़ार हिंसा की घटनाएं हुईं जबकि 2014 से 2024 के बीच सगभग 70 प्रतिशत की कमी के साथ ये संख्या 3428 रह गई। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों की मृत्यु में 70 प्रतिशत और नागरिकों की मृत्यु में 89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि सभी उग्रवादी समूहों के साथ मोदी सरकार ने समझौते किए और लगभग 10,500 से ज़्यादा विद्रोही हथियार डालकर मेनस्ट्रीम में आए हैं। श्री शाह ने कहा कि 10 साल में हमने विद्रोही समूहों के साथ 12 महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के तहत उत्तर-पूर्व की भाषाओं, बोलियों, संस्कृति, वेशभूषा, परंपरागत नृत्य और कलाओं को सम्मानित किया, संरक्षित किया और 10 हज़ार लोगों से हथियार डलवाकर पूरे उत्तर-पूर्व में शांति का माहौल खड़ा किया।

पूर्वोत्तर का विकास

श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पिछले 10 साल में पूर्वोत्तर के विकास के लिए कई प्रयास किए गए और बजटरी प्रोविज़न को भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 की तुलना में 2024-25 के बजट में 153 प्रतिशत की वृद्धि करने का काम नरेन्द्र मोदीजी ने किया। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी के लिए 41 हजार करोड़ रुपए सड़कों पर खर्च किए, 47 हजार करोड़ रुपए अलग से ग्रामीण सड़कों पर खर्च किए। उन्होंने कहा कि एक प्रकार से 90 हजार करोड़ रुपए नॉर्थ-ईस्ट में सिर्फ सड़कों के लिए मोदी सरकार ने खर्च किए। श्री शाह ने कहा कि हवाई कनेक्टिविटी के लिए 64 नए रूट शुरू किए, वायब्रेंट विलेज कार्यक्रम में 4800 करोड़ रुपए खर्च किए जो विशेषकर अरुणाचल को फायदा पहुंचाता है और रेलवे के लिए 18 हज़ार करोड़ रुपए दिए।

श्री शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार के दिल के बहुत नजदीक है। उन्होंने कहा कि सिर्फ बजट आवंटन नहीं बल्कि नॉर्थ-ईस्ट का विकास, एकता और शांति के लिए प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत सरकार पूर्ण रूप से कटिबद्ध है।