जब सरकार चिंता करती है, तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रगति करती है

| Published on:

    पिछले 11 वर्षों में भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जो राजनीतिक इच्छाशक्ति, बेहतर वित्त पोषण और सभी के लिए किफायती, सुलभ, समान एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित है। हमारे प्रयास हर नागरिक की भलाई को प्राथमिकता देते हुए एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के निर्माण पर केंद्रित है।

गौरतलब है कि 2014 में भारत को स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित मानव संसाधन, दवाओं एवं निदान की उपलब्धता और सेवा की गुणवत्ता में कमी जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा था, लेकिन आज एक सक्रिय स्वास्थ्य प्रणाली और व्यापक देखभाल केंद्रित दृष्टिकोण के कारण महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) इस क्रांति की आधारशिला है, जो स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाता है, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करता है, बीमारियों से लड़ने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक सार्वभौमिक पहुंच को बढ़ावा देता है। 1.77 लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य सेवा को समुदायों के और करीब ला रहे हैं। वहीं ई-संजीवनी एवं टेलीमानस जैसे प्लेटफ़ॉर्म ने विशेषज्ञ परामर्श को सुलभ बनाया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की मातृ मृत्यु अनुमान अंतर-एजेंसी समूह की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जो वैश्विक औसत गिरावट 48 प्रतिशत से लगभग दोगुनी है। शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि वैश्विक गिरावट 58 प्रतिशत है

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की मातृ मृत्यु अनुमान अंतर-एजेंसी समूह की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जो वैश्विक औसत गिरावट 48 प्रतिशत से लगभग दोगुनी है। शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि वैश्विक गिरावट 58 प्रतिशत है।

जैसे-जैसे गैर-संचारी रोगों का बोझ बढ़ रहा है, निवारक देखभाल पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मुख, स्तन और गर्भाशय के कैंसर की जांच की जा रही है। मई तक लगभग 28 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप, 27 करोड़ से ज्यादा लोगों की मधुमेह और 27 करोड़ लोगों की मुख कैंसर की जांच की जा चुकी है।

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को लगातार मजबूत किया जा रहा है। 2014 से अब तक छह नए टीके शुरू किए गए हैं, जिनमें मिशन इंद्रधनुष के तहत 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया है। हमने टीकाकरण सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए U-WIN पोर्टल बनाने हेतु नवीनतम तकनीक का सहारा लिया है, जिसमें 10.68 करोड़ लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया है और मई 2025 तक 42.75 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं।

भारत को 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया, 2015 में मातृ एवं नवजात शिशुओं में टिटनेस का उन्मूलन किया गया, और 2024 में ट्रेकोमा का उन्मूलन किया गया। 2015-2023 के बीच मलेरिया के मामलों और मौतों में 80 प्रतिशत से अधिक की कमी आई। हम 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य तक पहुंच गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2024 के अनुसार टीबी के मामलों में 17.7 प्रतिशत और मृत्यु दर में 21 प्रतिशत की कमी आई है। टीबी के ‘अज्ञात’ मामले 2015 के 15 लाख से घटकर 2024 में 1.2 लाख हो गए हैं।

स्वास्थ्य सेवा वित्तपोषण में भी सुधार हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के हिस्से के रूप में सरकारी स्वास्थ्य व्यय 1.13 प्रतिशत से बढ़कर 1.84 प्रतिशत (2014-2022) हो गया है, जबकि आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (ओओपीई) 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत हो गया है। निःशुल्क औषधि एवं निदान सेवाओं ने सामर्थ्य और सुगम्यता में वृद्धि की है, जिसके अंतर्गत 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में प्रयोगशाला सेवाएं, 34 राज्यों में सीटी स्कैन और 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में टेली-रेडियोलॉजी सेवाएं उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से 28 लाख से अधिक रोगियों को लाभ हुआ है, जिससे ओओपीई में 8,725 करोड़ रुपये की बचत हुई है। राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा (एनएएस) और मोबाइल चिकित्सा इकाइयों (एमएमयू) जैसी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों ने दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाई हैं।

स्वास्थ्य सेवा वित्तपोषण में भी सुधार हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के हिस्से के रूप में सरकारी स्वास्थ्य व्यय 1.13 प्रतिशत से बढ़कर 1.84 प्रतिशत (2014-2022) हो गया है, जबकि आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (ओओपीई) 62.6 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत हो गया है

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएमएबीएचआईएम) 2021 में शुरू किया गया था। इसके तहत 18,802 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 602 क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक और 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं को स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। एनएचएम के तहत 5.23 लाख अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों को नियुक्त किया है, जिनमें 1.18 लाख सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) शामिल हैं। 2018 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम सामुदायिक स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सा अधिकारियों के बीच की खाई को पाटता है।
पिछले 11 वर्षों ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा की नींव रखी है। देश सभी के लिए सुलभ, किफायती और समान स्वास्थ्य सेवा के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार है।

(लेखक भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हैं)