भारत में प्राचीन काल से ही महिलाओं के सम्मान की परम्परा और संस्कृति रही है। भारतीय परम्परा एवं इतिहास में इससे संबंधित उदाहरणों की कमी नहीं है। नारी और शक्ति शब्दों को एक-दूसरे का पर्याय कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि जब नारी के साथ शक्ति शब्द जुड़ जाता है तो वह ‘मां दुर्गा’ का साक्षात् अवतार ही बन जाती है और उसमें घर, समाज तथा दुनिया में व्याप्त बुराइयों के विरुद्ध लड़ने की एक अदम्य शक्ति उत्पन्न हो जाती है। सामाजिक एवं आर्थिक बुराई की अन्दरूनी सच्चाई के साथ-साथ समाज की घरेलू समस्याओं, महिलाओं से जुड़े मामलों, पुलिस प्रताड़ना, नशा, कैशौर्य समस्याओं और अपराध आदि का हमें गंभीरता से विश्लेषण करना चाहिए। उनकी कहानियां समाज में व्याप्त उन असामाजिक लोगों को भी सावधान करती हैं, जो नारी शक्ति शोषण करते हैं, और उसे प्रश्रय देते हैं। आज आधी आबादी की आवाज का दम नहीं घोटा जा सकता है। हर नारी शांति की किरण है, जो बुराइयों के अंधेरे को अपनी अदम्य नारीत्व शक्ति से दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। नारी के सम्मान को पुनर्स्थापित करने की आज महती आवश्यकता है। वैदिक काल में महिलाओं ने ऋचाओं की रचना की। वह विद्वतापूर्ण शास्त्रार्थ में सहभागी होती थीं। युद्ध क्षेत्र में उनकी भूमिका वीरांगनाओं के रूप में रहती थी। विदेशी आक्रान्ताओं के समय में महिलाओं की उपेक्षा शुरू हुई थी, इस कारण हमारे समाज में अनेक कमजोरियों ने स्थान बना लिया। रत्नप्रसूता भारत भूमि रानी अहिल्या बाई, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती जैसी अनेक वीरांगनाओं की जन्म एवं कर्मभूमि रही है।
नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वावलंबन एक साथ जुड़ेंगे, तो नारी सशक्तीकरण का लक्ष्य स्वतः ही पूरा होगा
वर्तमान में हमारी सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान का शुभारंभ किया जो सार्थक रूप में निरन्तर आगे बढ़ा है। इससे बेटियों के प्रति सम्मान, उनकी स्वास्थ्य शिक्षा, सुरक्षा के विषय शामिल हैं। इसके साथ ही महिला स्वावलंबन पर भी जोर दिया जा रहा है। आधी आबादी को उपेक्षित कर कोई देश विकास नहीं कर सकता। किसी भी सभ्य समाज में राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए या किसी से प्रतिशोध लेने के लिए महिलाओं-बच्चों पर जुल्म ढाना एक अक्षम्य अपराध होता है। उसे झेलने वाले समाज में क्रोध एवं हताशा का मिला-जुला भाव पैदा करता है।
देश और प्रदेशों में जहां-जहां भाजपा सरकारें हैं, वहां नारी सशक्तीकरण हमारी प्राथमिकताओं में है। हमारी सरकारें महिलाओं को रोजगार के समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 40 करोड़ जन-धन खातों में 22 करोड़ खाते महिलाओं के हैं। 35 करोड़ के करीब मुद्रा लोन दिए गए हैं। 70 फीसदी मुद्रा लोन लेने वाली महिलाएं हैं। यही नहीं, आज भारत दुनिया के उन देशों में है, जहां नौ-सेना और वायु सेना में महिलाओं को कोम्बेट रोल में शामिल किया जा रहा है।
कन्या भ्रूण हत्या हमारे लिए एक अभिशाप है। गर्भ में बेटी का पता लगते ही गर्भपात करा देने से सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है। हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी ने इस असंतुलन को समाप्त करने के लिए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान चलाया।
सुकन्या समृद्धि योजना में बेटियों की शिक्षा से लेकर विवाह तक की व्यवस्था की गई है। महिला कामगारों के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि में वृद्धि की गई है। यह अवधि बढ़ाकर 26 सप्ताह (6 माह) कर दी गई है ताकि वे अपने नवजात शिशु की अच्छी तरह देखभाल कर सकें। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अन्तर्गत 42 प्रतिशत नामांकन महिलाओं के हैं। अटल पेंशन योजना बैंक एवं डाकघरों के माध्यम से सदस्यता के लिए खुली है। अभी हाल ही में विधानसभा में प्रस्तुत बजट में 3 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी योजना’ के अन्तर्गत 1.5 प्रतिशत ब्याज दर से लोन उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है।
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मुख्यमंत्री सुपोषण-किट योजना तथा बालिका गृह में 50 बेड की सरस्वती होम बनाए जाने की घोषणा हमारी सरकार ने की है। 10 जिला मुख्यालयों पर गर्ल-चाइल्ड केयर सेंटर की स्थापना के साथ ही आंगनबाड़ी में सप्ताह में 5 दिन दुग्ध-वितरण की घोषणा की गई है। 10 लाख नए परिवार खाद्य-सुरक्षा योजना में शामिल करने की घोषणा भी प्रदेश के 2025-26 के बजट में की गई है।
देश की महिलाओं के कल्याण के लिए पं. दीनदयाल अन्त्योदय योजना के जरिये भी बहनों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुस्लिम बहनों को उत्पीड़न एवं शोषण से बचाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया गया है। कुछ वर्षों पहले तक बेसिक स्कूलों में शौचालय न होने के कारण बालिकाएं आगे की पढ़ाई छोड़ने को विवश हो जाती थीं। सरकार ने इस समस्या का समाधान भी किया, जिससे वे गौरवपूर्ण जीवन जीएं।
नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वावलंबन एक साथ जुड़ेंगे, तो नारी सशक्तीकरण का लक्ष्य स्वतः ही पूरा होगा।
(लेखक राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं)

