‘आप-दा नहीं सहेंगे, बदल के रहेंगे’

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के विधानसभा चुनावों की तारीख घोषित होते ही आम आदमी पार्टी (आप) के कुशासन के अंत की राह देख रही जनता में उत्साह का संचार हुआ है। आप सरकार के दस वर्षों का दौर कुशासन, व्यापक भ्रष्टाचार, झूठे वायदों और पंगु शासन का पर्याय बना रहा। परिणामतः स्वास्थ्य, शिक्षा, रोड, स्वच्छता और पेयजल जैसी आधारभूत समस्याएं राजधानी में दिनोंदिन भयावह होती गयीं।
आप नेता अरविंद केजरीवाल, जो अपने कई वरिष्ठ नेताओं के साथ भ्रष्टाचार के कई मामलों में फंसे हुए हैं, आज देश में सिद्धांतहीन एवं अवसरवादी राजनीति का एक शर्मनाक चेहरा बन गए हैं। उन्होंने न केवल राजनैतिक गिरावट में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं बल्कि भ्रष्टाचार, कुशासन एवं अनैतिक राजनीति का बेशर्मी के साथ महिमामंडन करने में महारत प्राप्त की है। ‘आप’ सरकार का कोई भी

आप सरकार के दस वर्षों का दौर कुशासन, व्यापक भ्रष्टाचार, झूठे वायदों और पंगु शासन का पर्याय बना रहा

आकलन, पिछले दस साल के इसके कुशासन को एक ‘आपदा’ की ही संज्ञा देगा। हर क्षेत्र में पूरी तरह से असफल आप सरकार पिछले दशक में दिल्ली के लिए भयावह आपदा साबित हुई है। दिल्ली में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आप सरकार की संवेदनहीनता को गिनाते हुए कहा कि जब दिल्ली ऑक्सीजन एवं दवाइयों के लिए संघर्ष कर रही थी, तो उनका ध्यान ‘शीशमहल’ पर था। परिणाम यह है कि दिल्ली की जनता आज ‘आप-दा नहीं सहेंगे, बदल के रहेंगे’ का समर्थन कर रही है।

अपने पुराने पापों को छिपाने के लिए कांग्रेस जब संविधान और ‘भारत रत्न’ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम लेती है तो सच में बड़ा आश्चर्य होता है। कांग्रेस द्वारा संविधान पर निरंतर हमले तथा बाबा साहेब तथा उनकी विरासत के अपमान करने का एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास है। कांग्रेस द्वारा अपने राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार संविधान को किस प्रकार से बदला गया, देश अभी तक भूला नहीं है। संविधान की आत्मा और इसके मूल्यों को कांग्रेस के तानाशाही नेतृत्व द्वारा बार-बार कुचला गया है। यहां तक कि कांग्रेस ने देश पर आपातकाल तक थोपा, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया, विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, मीडिया पर सेंसरशिप लगाया और ‘मीसा’ जैसे काले कानून बनाए। गैर-कांग्रेसी सरकारों को गिराने एवं अस्थिर कर भारतीय संघवाद को खोखला करने का कांग्रेस का काला इतिहास रहा है। यहां तक कि किस प्रकार से अनेक बार केंद्र सरकार को गिराकर देश को राजनैतिक अस्थिरता में झोंका गया, सभी को मालूम है। परिवारवाद-वंशवाद में अटूट विश्वास रखने वाली कांग्रेस संविधान सम्मत लोकतांत्रिक मूल्यों एवं सिद्धांतों की तिलांजलि देकर केवल एक परिवार की दास बन चुकी है। इसका नेतृत्व संवैधानिक संस्थाओं को हमेशा अपनी राह का रोड़ा मानकर अपमान करता रहा है और जब भी संभव हुआ उनके अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि कांग्रेस आज एकाधिकारवाद एवं तानाशाही के लिए जानी जाती है।

स्वतंत्रता काल से ही कांग्रेस का लोकतंत्र विरोधी चेहरा उजागर हुआ था, जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित अनेक विभूतियों को अपमानित कर दरकिनार किया जाने लगा। बाबा साहेब को निरंतर अपमान एवं तिरस्कार सहना पड़ा तथा अत्यंत निराशापूर्ण स्थिति में नेहरू कैबिनेट से त्यागपत्र देने को बाध्य हुए। संविधान निर्माता के रूप में उनके योगदान की उपेक्षा की गई तथा उन्हें कांग्रेस द्वारा न तो ‘भारत रत्न’ का सम्मान दिया गया और न ही उनके चित्र को संसद के केंद्रीय-कक्ष में स्थान दिया गया।

जब भाजपा समर्थित सरकार केंद्र में आई, तब बाबा साहेब को कृतज्ञ राष्ट्र ने ‘भारत रत्न’ से सुशोभित किया तथा श्री अटल बिहारी वाजपेयी के अथक प्रयासों से उनका चित्र संसद के केंद्रीय कक्ष में लगाया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा साहेब की विरासत को सम्मान देने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, ‘पंचतीर्थ’ का विकास किया है, ‘भीम एप’ का शुभारंभ हुआ है तथा बाबा साहेब के दिखाए रास्ते पर चलने के लिए मोदी सरकार कृतसंकल्पित है। आज जब जन-जन का आशीर्वाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा पर बरस रहा है, केंद्र एवं राज्यों की राजग सरकारें वंचित, शोषित, पीड़ित एवं समाज के कमजोर वर्गों के हित में निरंतर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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