दिल्ली विधानसभा चुनावों के दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, लोग भारी संख्या में भाजपा का समर्थन करने अपने घरों से बाहर आ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि भाजपा की नीतियों एवं कार्यक्रमों में जन-जन का विश्वास दिनोंदिन और अधिक सुदृढ़ होता जा रहा है। भाजपा संकल्प पत्र से दिल्ली की जनता को आशा की एक नई किरण दिखी है। आम आदमी पार्टी (आप) के पिछले एक दशक के कुशासन से जनता त्रस्त है। आप सरकार जो भ्रष्टाचार, जनता के धन की लूट, प्रतिगामी नीतियों तथा जनविश्वास से
आप सरकार के कारण पिछला पूरा दशक बर्बादी का दशक बनकर रह गया। विकास थम गया, अवसंरचनाएं जर्जर हो गईं तथा गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए जीवन चलाना तक कठिन हो गया, उनके लिए अवसर घटते गए
खिलवाड़ की पर्याय बन चुकी है, उसके नेता अरविंद केजरीवाल ने अपने झूठे वादों, हर मोर्चे पर नाकामी तथा घटिया राजनीति से लोगों की पीठ में छूरा घोंपा है। जहां वे अपने कई मंत्रियों के साथ भ्रष्टाचार एवं घोटालों में फंसे हुए हैं, वहीं उन्होंने दिल्ली की जनता को मूल सुविधाओं से भी वंचित कर दिया है। उनके कुशासन से दिल्ली में हर वर्ग का जीवन दुष्कर हो गया है। आप सरकार के कारण पिछला पूरा दशक बर्बादी का दशक बनकर रह गया। विकास थम गया, अवसंरचनाएं जर्जर हो गईं तथा गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए जीवन चलाना तक कठिन हो गया, उनके लिए अवसर घटते गए। ऐसी विकट परिस्थिति में ‘भाजपा संकल्प पत्र’ दिल्ली के विकास की दिशा दिखा रही है तथा हर वर्ग के लिए राहत लेकर आई है। इसकी भविष्योन्मुखी दृष्टि से देश की राजधानी अवश्य ही विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित होगी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा ‘इंडियन स्टेट’ पर हमला करते हुए दिए गए वक्तव्य की पूरे देश में घोर निंदा हुई है। इस वक्तव्य से न केवल कांग्रेस की अलोकतांत्रिक मानसिकता का पता चलता है, बल्कि वे संवैधानिक संस्थाएं जिनसे देश अपनी यात्रा के लिए ऊर्जा प्राप्त करता है, उनके विरुद्ध चल रहे भयावह षड्यंत्र का भी पर्दाफाश हुआ है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने ठीक ही कहा है कि राहुल गांधी के इस वक्तव्य से उनके इकोसिस्टम के अर्बन नक्सल तथा डीप स्टेट के नजदीकी संबंधों का पता चलता है जो भारत को बदनाम करना, नीचा दिखाना एवं इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न लगाना चाहते हैं। ध्यातव्य है कि राहुल गांधी एवं अन्य कांग्रेस नेता लगातार ऐसे वक्तव्य देने के आदी हो गए हैं, जिससे भारतीय हितों को नुकसान पहुंचता हो। यहां तक कि पाकिस्तान ने भी कई अवसरों पर इनके वक्तव्यों का सहारा लिया है। राहुल गांधी के इस वक्तव्य को उनके द्वारा दिए गए पूर्व के बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिससे एक सोची-समझी पैटर्न को देखा जा सकता है। इसमें कोई शंका नहीं कि इस प्रकार के बयानों से उन तत्वों को बल मिलता है जो भारत के बढ़ते वैश्विक कद से असहज हो रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस नेतृत्व के सत्ता-केंद्रित राजनीति के कारण, वह देश में विभाजनकारी एवं विकृत राजनीति का ग्रास बन गई है तथा अपने राजनैतिक स्वार्थों के आगे देखने में पूरी तरह से असमर्थ है। सत्ता की अंधी दौड़ में कांग्रेस न्यायपालिका, चुनाव आयोग एवं संसद जैसी गरिमापूर्ण संवैधानिक संस्थाओं पर भी आघात करने से नहीं हिचक रही। यहां तक कि संविधान की पवित्रता को भी इसने तार-तार किया है। कांग्रेस नेतृत्व की यह मानसिकता देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
कांग्रेस आज भारतीय राजनीति में अधिनायकवाद, वंशवाद एवं भ्रष्ट राजनीति का जीता-जागता प्रतीक है। यह न केवल लोकतंत्र विरोधी है, बल्कि पूर्व में देश पर तानाशाही भी लादने का विफल प्रयास कर चुकी है। जहां कई अवसरों पर इसने संविधान की धज्जियां तो उड़ाई ही, वहीं लगातार इसने ‘भारत रत्न’ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान किया। जहां कांग्रेस ने बाबा साहेब के देश के लिए किए गए योगदानों को सम्मानित करने से इनकार किया, वहीं प्रधानमंत्री श्री मोदी के दूरदर्शी एवं सुदृढ़ नेतृत्व में आज देश बाबा साहेब के बताए रास्ते पर चल रहा है। आज जब ‘विकसित भारत’ का मंत्र देश की आकांक्षाओं को नए पंख लगा रहा है, कांग्रेस अपने विभाजनकारी एजेंडे से भारत की उड़ान को बाधित करना चाहती है। विश्व आज उभरते भारत का जब स्वागत कर रहा है, ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का सिद्धांत पूरे देश को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट कर रहा है।

