राष्ट्र संविधान के सिद्धांतों, मूल्यों एवं भावना पर अपनी निष्ठा पुनः व्यक्त कर रहा है

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भारत के राष्ट्रपति द्वारा संसद के एक विशेष संयुक्त सत्र को 26 नवंबर, 2024 को प्रेरक संबोधन के साथ देश का ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ने का संकल्प और भी अधिक सुदृढ़ हुआ है। साथ ही, संविधान के अंगीकृत होने के 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संसद में हुई चर्चा से देश का संविधान, इसके मूल्यों एवं सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्धता पुनः परिलक्षित हुई है। संविधान, भारतीय लोकतंत्र को गढ़ने में इसकी भूमिका तथा न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित चर्चा में विभिन्न राजनैतिक दलों के सांसदों ने भाग लिया। ध्यातव्य है कि ‘संविधान दिवस’ संविधान के अंगीकार करने की दिवस के रूप में हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। इस वर्ष 26 नवंबर को संविधान के अंगीकृत होने का 75वीं वर्षगांठ है।

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां इस अवसर पर हुई बहस देश के लिए उदाहरण बनते तथा जन-जन को संवैधानिक मूल्यों के प्रति सजग कर उनके संवैधानिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया जाता, वहीं

कांग्रेस ने न केवल संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग किया, बल्कि अपनी निरंकुश सत्ता के बल पर अपनी सत्ता को चुनौती देने वाली आवाजों को निर्ममता से कुचला

कांग्रेस के नेतृत्व वाली विपक्ष ने अपने राजनैतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए इसका अनुचित लाभ लेने का प्रयास किया। जब भी संविधान पर कोई बहस होती है, कांग्रेस का संविधान पर हमले एवं इसकी आत्मा को कुचलने का काला इतिहास देश के सामने जरूर आता है, यही कारण है कि इस बहस के दौरान, अपने काले इतिहास से देश का ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस आधारहीन आरोपों का सहारा लेने पर उतर आई। देश आज भी नहीं भूला है जब सत्ता का खुला दुरुपयोग कर कांग्रेस ने देश पर आपातकाल थोपा था। इस समय जनता से मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे, विपक्ष के नेताओं को सलाखों के पीछे डाल दिया गया था, प्रेस पर पाबंदियां लगा दी गई थीं, न्यायपालिका को डराया-धमकाया जा रहा था तथा संविधान की हत्या की जा रही थी। जिस प्रकार से कांग्रेस ने प्रदेशों के गैर-कांग्रेसी सरकारों को अस्थिर कर गिराया तथा केंद्र तक में लोकतांत्रिक जनादेश का हनन किया गया, अभी भी राष्ट्रीय मानस में अंकित है। कांग्रेस ने न केवल संवैधानिक प्रावधानों का दुरुपयोग किया, बल्कि अपनी निरंकुश सत्ता के बल पर अपनी सत्ता को चुनौती देने वाली आवाजों को निर्ममता से कुचला। संविधान में वर्णित लोकतांत्रिक भावना के पूरी तरह विरुद्ध जाकर कांग्रेस ने देश पर अपनी तानाशाही लादने के प्रयास किए।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्टूबर, 2015 को मुंबई में डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्मारक का शिलान्यास करते हुए घोषणा की थी कि ‘भारत रत्न’ डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की स्मृति में 26 नवंबर संविधान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह निर्णय जन-जन में संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने तथा संविधान निर्माताओं, विशेषकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान निर्माण में योगदान का सम्मान करने के लिए गया। जहां, भाजपा एवं भाजपा सरकारें बाबा साहेब के बताए रास्ते पर चलने, संविधान के सिद्धांतों, मूल्यों एवं भावना का सम्मान करने के लिए जानी जाती है, वहीं पीड़ितों, वंचिंतों एवं शोषितों के लिए इनके द्वारा किए गए कल्याणकारी कार्यों से दलित, आदिवासी, पिछड़े, महिला एवं युवा वर्गों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। भाजपा ने बाबा साहेब की समृद्ध विरासत का सम्मान ‘पंचतीर्थ’, के निर्माण तथा उनके विचारों को समाज में स्थापित करने के प्रयासों के माध्यम से कर रही है। दूसरी ओर, इससे ठीक विपरीत, कांग्रेस ने बाबा साहेब का निरंतर अपमान किया। उन्हें चुनाव हरवाया, कैबिनेट से त्याग पत्र देने के लिए बाध्य किया, न उन्हें ‘भारत रत्न’ दिया न ही उनके चित्र संसद के केंद्रीय कक्ष में कभी लगाया तथा उनके विरासत को दरकिनार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के समृद्ध विरासत पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, इस संबंध में उसका कोई भी प्रायश्चित कभी स्वीकार्य नहीं होगा। आज, जब पूरा राष्ट्र संविधान के सिद्धांतों, मूल्यों एवं भावना पर अपनी निष्ठा पुनः व्यक्त कर रहा है, बाबा साहेब की विरासत जन-जन को प्रेरित कर रही है।

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