करीब चार दशकों तक बस्तर वामपंथी उग्रवाद के साये में रहा। आज यह बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। आदिवासी बहुल इलाकों के लोगों के लिए लक्षित कल्याणकारी कार्यक्रमों एवं रणनीतिक सुरक्षा अभियानों के कारण अब भय का स्थान एक उम्मीद की किरण ने ले लिया है।
छत्तीसगढ़ की आदिवासी विरासत से प्रेरित हमारी सरकार एक शांतिपूर्ण एवं समृद्ध क्षेत्र बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, हम अपने लोगों की समृद्ध संस्कृति से प्रेरणा लेते हैं। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है— अगले साल मार्च तक दशकों से चले आ रहे उग्रवाद को खत्म करना और बस्तर के लोगों को विकास की मुख्यधारा में लाना। हमारी सरकार 2023 में सत्ता संभालने के बाद से ही इस क्षेत्र के लोगों के साथ सीधे जुड़ाव को प्राथमिकता दे रही है। मैंने अब तक 77 बार बस्तर का दौरा किया है और इस दौरान मुख्य रूप से स्थानीय जरूरतों को पूरा करने वाली योजनाओं को आकार देने का काम किया गया है।
ये दौरे प्रशासनिक कर्तव्यों से कहीं बढ़कर हैं। ये ग्रामीणों के साथ चलने, उनकी आकांक्षाओं को सुनने और यह सुनिश्चित करने के लिए दिल से किए गए प्रयास हैं कि प्रगति की बयार उनके दरवाजे तक पहुंचे। बस्तर की बहुसंख्यक आदिवासी आबादी का सरकार पर भरोसा तब और बढ़ गया जब उन्होंने देखा कि उनमें से ही एक व्यक्ति अब हमारा नेतृत्व कर रहा है और प्रशासनिक पहलों में ठोस नतीजे आ रहे है। इस जुड़ाव ने समुदायों को आश्वस्त किया है कि मेरी सरकार कार्रवाई करने और संघर्ष के घावों को भरने के लिए प्रतिबद्ध है।
कभी बारूद की तीखी गंध से महकती बस्तर की हवा में आज महुआ के फूलों की खुशबू है, जो आदिवासी जीवन का एक प्रतीक है। कभी सुनसान रहने वाले बाजार आज व्यापार के जीवंत केंद्र बन गए हैं। उग्रवादियों द्वारा बंद किए गए स्कूल अब छात्रों का स्वागत कर रहे हैं। सुकमा में 50 से अधिक
कभी बारूद की तीखी गंध से महकती बस्तर की हवा में आज महुआ के फूलों की खुशबू है, जो आदिवासी जीवन का एक प्रतीक है। कभी सुनसान रहने वाले बाजार आज व्यापार के जीवंत केंद्र बन गए हैं। उग्रवादियों द्वारा बंद किए गए स्कूल अब छात्रों का स्वागत कर रहे हैं। सुकमा में 50 से अधिक प्राथमिक विद्यालय फिर से खोले गए हैं और सात नए स्कूल स्थापित किए गए हैं। कभी उग्रवादियों के कब्जे में रहने वाली सड़कें अब जीवन से गुलजार हैं
प्राथमिक विद्यालय फिर से खोले गए हैं और सात नए स्कूल स्थापित किए गए हैं। कभी उग्रवादियों के कब्जे में रहने वाली सड़कें अब जीवन से गुलजार हैं।
बस्तर में सामान्य स्थिति और विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए जगरगुंडा में इंडियन ओवरसीज बैंक की एक शाखा की स्थापना की गई है। यह एक सुदूर और ऐतिहासिक रूप से अस्थिर क्षेत्र है, जिसने दशकों तक उग्रवाद का सामना किया है। इस पहल से 12 गांवों के निवासियों को बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच मिलेगी।
बस्तर ओलंपिक के साथ-साथ बस्तर पंडुम जैसे पारंपरिक आदिवासी त्योहारों को धूमधाम से मनाना इस क्षेत्र की विरासत को संजोते हुए विकास को अपनाने की इच्छा को दर्शाता है। यह बदलाव केंद्र और राज्य के बीच सहयोग का नतीजा है।
पिछले 17 महीनों में 1,355 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और पुनर्वास तथा बेहतर जीवन का विकल्प चुना है। लगभग 1,429 अन्य को गिरफ्तार किया गया है तथा 420 से अधिक उग्रवादियों को मार गिराया गया है। उग्रवादियों का नेटवर्क काफी हद तक कमजोर हो गया है। राज्य पुलिस ने पाया है कि हिंसक घटनाओं में 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
छत्तीसगढ़ की नई नीति – जो 120 दिनों के भीतर पुनर्वास की गारंटी देती है – हथियार छोड़ने वालों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल होने में मदद कर रही है। हमारी सरकार ने इस क्षेत्र के सुदूर गांवों तक आवश्यक सेवाओं की डिलीवरी को प्राथमिकता दी है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और विकास कार्यों के निर्बाध निष्पादन को सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए जा रहे हैं।
फरवरी, 2024 में 20 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई नियाद नेला नार योजना, जिसे स्थानीय बोली में ‘आपका अच्छा गांव’ कहा जाता है, 130 माओवाद प्रभावित गांवों में आदिवासी परिवारों तक सीधे सरकारी योजनाएं पहुंचाती हैं। यहां मौजूद 61 सुरक्षा शिविरों को अब सुविधा केंद्रों में तब्दील किया गया है, जो स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे पहलों को लागू करने में निर्णायक भूमिका निभा रहे है। जगरगुंडा और चार अन्य स्थानों पर 25 वर्षों से बंद वन विभाग के कार्यालय फिर से खुल गए हैं, जिससे बस्तर के मुख्य वन क्षेत्रों में शासन व्यवस्था बहाल हो गई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 50,000 से अधिक पक्के घर बनाए गए हैं, जिससे आदिवासी परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवनयापन का अधिकार मिला है। जल जीवन मिशन ने लगभग 1.2 लाख परिवारों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराया है, जिससे स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

हमारी सरकार एक ऐसे भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां बस्तर अवसरों के केंद्र के रूप में विकसित हो। 300 किलोमीटर से अधिक नई सड़कें निर्माणाधीन हैं, जो दूरदराज के गांवों को बाजारों और सेवाओं से जोड़ती हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और कौशल विकास केंद्र बस्तर के युवाओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था में सफल होने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं
वन आधारित आजीविका के महत्व को समझते हुए हमारी सरकार ने तेंदू पत्ता (इसका उपयोग बीड़ी बनाने में किया जाता है) की कीमत 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी है। ये प्रयास बस्तर के विविध आदिवासी समुदायों, जिनमें गोंड, मारिया और मुरिया शामिल हैं, की ज़रूरतों के हिसाब से किए गए हैं। जन आशीर्वाद यात्राओं और जनसंपर्क अभियानों जैसी पहलों के ज़रिए हमारी सरकार ने लोगों की शिकायतों को सुना है। कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, बीजापुर और नारायणपुर सहित पूरे क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए बस्तर विकास प्राधिकरण के जरिए काफी धन आवंटित किया गया है। सुकमा जिले को अतिरिक्त संसाधन मुहैया कराए गए हैं।
हमारी सरकार एक ऐसे भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां बस्तर अवसरों के केंद्र के रूप में विकसित हो। 300 किलोमीटर से अधिक नई सड़कें निर्माणाधीन हैं, जो दूरदराज के गांवों को बाजारों और सेवाओं से जोड़ती हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और कौशल विकास केंद्र बस्तर के युवाओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था में सफल होने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। इकोटूरिज्म को बढ़ावा देकर और क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित करके हमारी सरकार का लक्ष्य स्थायी आजीविका का निर्माण करना है, साथ ही दुनिया को बस्तर की सुंदरता देखने के लिए आमंत्रित करना है।
हिंसा को कम करना, समुदायों को सशक्त बनाना और बुनियादी ढांचे का निर्माण नये बस्तर के निर्माण की दिशा में कुछ महत्वपूर्ण कदम हैं। वह दिन दूर नहीं जब वामपंथी उग्रवाद का दाग इस क्षेत्र से मिट जाएगा और इसके आदिवासी समुदाय विकास का जश्न मनाएंगे और एक शांतिपूर्ण एवं समृद्ध भविष्य को अपनाएंगे।
(लेखक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं)

