आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। तिरंगा पूरी शान से लहरा रहा है और हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा है। ऑपरेशन सिंदूर ने हमारी सैन्य नीति को एक नई दिशा दी है। यह सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि नए भारत की चेतावनी है: अगर हमें छेड़ा जाएगा, तो छोड़ा नहीं जाएगा। एक भारतीय नागरिक और भाजपा के एक कार्यकर्ता के रुप में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और हमारी सेनाओं के पराक्रम पर गर्व करता हूं।
यह सब उस क्रूर आतंकी घटना से शुरु हुआ जिसने हमारी आत्मा को झकझोर दिया। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में धार्मिक यात्रियों और पर्यटकों पर हमला हुआ। केवल उनके धर्म के कारण निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से मार डाला गया। परिवारों के सामने उनके अपनों को मौत के घाट उतार दिया गया। इस वीभत्स नरसंहार में 28 निर्दोष नागरिकों की जान गई। पूरे देश में रोष और शोक की लहर थी। पहलगाम की त्रासदी के बाद जो आवाजें उठीं, वे कह रही थीं— अब और नहीं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस वेदना को संकल्प में बदला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस नरसंहार के दोषियों को भारत की पूरी ताकत का सामना करना पड़ेगा। न अब सिर्फ बयानबाजी होगी, न सीमित प्रतिक्रियाएं। अब भारत न्याय दिलाने के लिए जो भी जरूरी हो, करेगा।
निर्णय उच्चतम स्तर पर स्पष्टता के साथ लिया गया। प्रधानमंत्री श्री मोदी का नेतृत्व हमेशा निर्णायक, गतिशील और साहसी रहा है, लेकिन इस संकट की घड़ी में उन्होंने अपने ही मानकों को पार कर दिया। उन्होंने हमारी सेनाओं को पूर्ण स्वतंत्रता दी— किसी भी स्थान पर आतंक को कुचलने की छूट। अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, अब कोई विलंब नहीं था। वर्षों बाद भारत की प्रतिक्रिया केवल सीमा पर जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सीधा दुश्मन की मांद में घुसने का ऐलान था। मैं उस समय लिए गए निर्णयों का साक्षी रहा-संदेश साफ थाः पहलगाम में गिरी हर बेकसूर भारतीय की बूंद-बूंद का हिसाब लिया जाएगा। अब ‘संयम’ वाला पुराना पत्रा फाड़ दिया गया था। नया भारत अब हर आतंकी हमले को युद्ध मानकर उत्तर देगा।
और तब शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर-एक ऐसा नाम जो उस पवित्र सिंदूर का प्रतीक है जिसे आतंकियों ने मिटाने की कोशिश की थी। 7 मई की भोर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओजेके के अंदर घुसकर साहसिक हमला किया। बहावलपुर, मुरीदके, मुज़फ्फराबाद जैसे आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना ने सटीक एयरस्ट्राइक की। ये वो गढ़ थे जहां वर्षों से वैश्विक जिहाद की फैक्ट्रियां चल रही थीं। उस रात हमारी मिसाइलों ने इन अड्डों को मलबे में बदल दिया।
पाकिस्तान बौखलाहट में आगबबूला हो गया। आतंक को खत्म करने की बजाय, उसने भारतीय नागरिक क्षेत्रों पर रॉकेट और तोप से हमला किया। लेकिन भारत पूरी तरह तैयार था। हमारी वायु रक्षा प्रणाली ने हर हमले को निष्क्रिय कर दिया। एक भी भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान नहीं पहुंचा। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया नाकाम रही।
खबरें आने लगीं— सिर्फ पहले हमले में ही 100 से ज्यादा खूंखार आतंकियों का सफाया कर दिया गया। इनमें कई शीर्ष कमांडर भी थे जो पाकिस्तान की शरण में ऐश कर रहे थे और भारत के खिलाफ षड्यंत्र रचते रहे थे। उन्हें लगा था कि सीमा पार होने से वे सुरक्षित हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने उनकी यह गलतफहमी हमेशा के लिए तोड़ दी। भारत ने यह साबित कर दिया कि उसके न्याय का हाथ बहुत लंबा है। जिन लोगों ने हमारे निर्दोषों की हत्या की, उन्हें एक ही वार में खत्म कर दिया गया। यह न्याय था— ठंडा, सटीक और निष्पक्ष।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया वही रही-हैरानी, इनकार और पागलपन। पहले कुछ घंटों तक उनके जनरल सन्न रह गए। उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि भारत इतनी गहराई तक हमला कर सकता है। लेकिन फिर वही पुरानी कायरता सामने आई। आतंक को खत्म करने की बजाय, उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी जिसका निशाना हमारे नागरिक और सीमावर्ती गांव थे। अंतर देखिए: भारत ने आतंकियों को निशाना बनाया और पाकिस्तान ने नागरिकों को।
इसके बाद आया दूसरा चरण। 10 मई को भारत ने फिर हमला किया— इस बार पाकिस्तान की सैन्य संरचना को लक्ष्य बनाया गया। सरगोधा, स्कर्दू, जैकबाबाद और भोलारी जैसे एयरबेस पर हमले किए गए। इस्लामाबाद के पास स्थित नूर स्थान एयरबेस को भी निशाना बनाया गया। पाकिस्तान की सैन्य रीढ़ टूट गई। उनके F-16 लड़ाकू विमान ज़मीन से उठ ही नहीं सके। उनके जनरल स्तब्ध रह गए।
जब सैन्य मोर्चे पर भी वे असफल हो गए, तो पाकिस्तान घबरा गया। लेकिन भारत का अभियान अभी पूरा नहीं हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर का दूसरा चरण और भी विनाशकारी था। इसने पाकिस्तान की रक्षा शक्ति और उसके आत्मबल को पूरी तरह तोड़ डाला। 10 मई की भोर में, जब पाकिस्तान अपने ज़ख्मों को सहला रहा था, हमारी वायुसेना ने एक के बाद एक हमले कर पाकिस्तान के सैन्य ठांचे को तहस-नहस कर दिया।
इस बार लक्ष्य थे— सरगोधा, स्कर्दू, जैकबाबाद, सुक्कुर और कराची के पास भोलारी। हर जगह धमाके हुए। हमारे लड़ाकू विमान भारतीय वायुक्षेत्र से मिसाइल दाग रहे थे और लंबी दूरी की तोपें सीमा पार कर वार कर रही थीं। 20-25 मिनट में पाकिस्तान की कई एयरबेस ठप हो गईं।
एक विशेष हमले का ज़िक्र आवश्यक है— रावलपिंडी के चकलाला स्थित नूर खान एयरबेस पर हुआ प्रहार। यह पाकिस्तान की सैन्य कमान और परमाणु नियंत्रण का केंद्र है। इसे निशाना बनाकर भारत ने स्पष्ट संदेश दिया— यदि आतंक को समर्थन दोगे, तो तुम्हारी सबसे सुरक्षित एयर बेस भी बच नहीं पाएगी। उस हमले ने पाक सेना के पैरों तले ज़मीन खिसका दी। वर्षों तक पाकिस्तान ने ‘परमाणु धमकी’ की ढाल ली हुई थी। 10 मई को वह भ्रम चकनाचूर हो गया। पाकिस्तान का कोई कोना भारत की पहुंच से बाहर नहीं रहा।
यहीं से पाकिस्तान ने संघर्ष विराम की गुहार लगाई। जो देश पहले धमकी देता था, अब शांति की भीख मांग रहा था। लेकिन मोदी जी ने स्पष्ट किया— भारत ने अपने लक्ष्य प्राप्त किए हैं, पर यह अंत नहीं, सिर्फ विराम है। भविष्य में कोई भी आतंकी हमला युद्ध माना जाएगा। हमारी नीति बदल चुकी है।
ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, एक रणनीतिक सिद्धांत है। अब हम प्रतिक्रिया नहीं देते, हम कार्रवाई करते हैं। अब हम सहन नहीं करते, हम खत्म करते हैं। यही है नया भारत। हमारी सेनाओं ने अद्वितीय साहस, सटीकता और व्यावसायिकता दिखाई। राफेल उड़ानों ने दुश्मन के अड्डों को ध्वस्त किया। मिसाइल यूनिट्स ने शल्य जैसी मार की। नौसेना ने समुद्र पर पकड़ बनाई। यह सामूहिक विजय थी।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आदमपुर एयरबेस पर जवानों को सलामी दी। उन्होंने गरजकर कहा— “भारत माता की जय” जब हमारे जवान बोलते हैं, तो दुश्मन कांपते हैं। उन्होंने कहा— हमने सिर्फ आतंकी ठिकानों को नहीं, पाकिस्तान के घमंड को भी चूर कर दिया है।
‘टूलकिट गिरोह’ वामपंथी-उदारवादी गठजोड़ ने हमेशा की तरह इस विजय को कमतर आंकने की कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाए, सबूत मांगे, और दुश्मन की भाषा बोले। लेकिन देश की जनता ने उनकी झूठी कहानियों को नकार दिया। जनता मोदी जी और हमारी सेना के साथ खड़ी रही।
ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, आत्मविश्वास से भरे भारत की घोषणा है। मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने स्पष्ट कर दिया है— अब हम पहले प्रहार करेंगे, कड़ा प्रहार करेंगे, और वहीं प्रहार करेंगे जहां सबसे ज़्यादा दर्द होगा।
हमने ‘परमाणु ब्लैकमेल’ की नौटंकी को उजागर कर दिया है। हमने नई रेड लाइन खींच दी है— अब आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ नहीं चल सकते, खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
हमारे सैनिकों को कोटि-कोटि नमन। प्रधानमंत्री श्री मोदी को राष्ट्र का गौरव बनाने के लिए धन्यवाद। और हमारे दुश्मनों को संदेश स्पष्ट है— अब कभी नहीं।
भारत माता की जय।
जय हिंद।
(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं)

