जननेता ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी

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पुण्यतिथि-16 अगस्त

टलजी ने भारतीय राजनीति में एक अनूठी और गौरवशाली विरासत छोड़ी है। उन्होंने वास्तव में भारत की भावना का प्रतिनिधित्व किया, जहां लोकतांत्रिक परंपराओं ने राष्ट्र के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को आकार दिया है। वह राजनीति में आपातकाल और तानाशाही प्रवृत्तियों का विरोध करने में भी सबसे आगे रहे। उनका राष्ट्रवाद लोकतांत्रिक भावना से ओत-प्रोत था, जिसमें भारतीय समाज की विविधताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सरोकारों के विभिन्न मुद्दों पर आम सहमति विकसित करने की परंपरा के माध्यम से संबोधित किया गया है। अपने लंबे संसदीय जीवन में वे विपक्ष में रहते हुए भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी अमिट छाप छोड़ने में सफल रहे।

राष्ट्र को परेशान करनेवाली विभिन्न समस्याओं पर उनकी पकड़ के कारण ही उन्होंने राष्ट्रीय लोकाचार और मूल्य आधारित राजनीति के भीतर सभी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास किया। देश की मिट्टी से जुड़े वह एक ऐसे नेता थे, जो अपनी राजनीतिक अंतर्दृष्टि के लिए जाने जाते थे, इस बात का उनके राजनीतिक विरोधी भी सम्मान करते थे। राष्ट्र को उन पर इतना विश्वास था कि संकट के समय उनके राजनीतिक विरोधियों ने भी उनकी सलाह ली थी। ‘मां भारती’ के सच्चे सपूत के रूप में उन्होंने कई मौकों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठना पसंद किया और राष्ट्रीय हितों की वेदी पर पार्टी के हितों का त्याग करने के विकल्प को भी चुना। जब आपातकाल घोषित किया गया, तो जनसंघ का विलय व्यापक राष्ट्रीय हित में जनता पार्टी में कर दिया गया। सिद्धांतों और विचारधारा पर एक अडिग नेता के रूप में वह भारतीय जनता पार्टी बनाने के लिए अपने सहयोगियों के साथ जनता पार्टी से बाहर आए। उनका सैद्धांतिक और मूल्य आधारित राजनीति पर अटूट विश्वास था।

पूर्व रियासत ग्वालियर (अब मध्य प्रदेश राज्य का हिस्सा) में 25 दिसंबर, 1924 को एक सामान्य स्कूल शिक्षक के परिवार में जन्मे श्री वाजपेयी का सार्वजनिक जीवन में उदय उनके राजनीतिक कौशल और

राष्ट्र को उन पर इतना विश्वास था कि संकट के समय उनके राजनीतिक विरोधियों ने भी उनकी सलाह ली थी। ‘मां भारती’ के सच्चे सपूत के रूप में उन्होंने कई मौकों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठना पसंद किया और राष्ट्रीय हितों की वेदी पर पार्टी के हितों का त्याग करने के विकल्प को भी चुना

भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती को दर्शाता है। दशकों बाद वह एक ऐसे नेता के रूप में उभरे, जिन्हें उनके उदार विश्वदृष्टि और लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए जाना गया।

एक उत्कृष्ट वक्ता के रूप में उन्होंने अपनी जादुई शैली से जनता को मंत्रमुग्ध किया। राष्ट्र उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था और यह सपना देश में लोगों के बढ़ते समर्थन के साथ साकार भी हुआ। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने उल्लेखनीय सफलता के साथ हर मोर्चे पर देश का नेतृत्व किया। भारत एक शांतिपूर्ण परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में उभरा, जो अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद भी अपने पथ पर चलता रहा। एक सच्चे ‘अटल’ के रूप में वे कभी दबाव में नहीं झुके, बल्कि यह उनके लिए वैश्विक स्तर पर भारत की आंतरिक ताकत को साबित करने का एक अवसर था। उन्होंने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देते हुए और भारत को विभिन्न मोर्चों पर ‘आत्मनिर्भर’ बनाते हुए सुशासन और विकास की एक नई गाथा लिखी। जैसाकि उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था, उन्होंने समय के कैनवास पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके द्वारा दिखाया गया मार्ग उभरते हुए नए भारत के लिए मार्गदर्शक बन गया।

अटलजी ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी देशभक्ति और राष्ट्र प्रेम की गहन भावना के साथ सार्वजनिक जीवन में योगदान देने के लिए सभी को प्रेरित किया है। भारतीय राजनीति में विकल्प देने के उद्देश्य से शुरू हुए राजनीतिक आंदोलन की परिणति उनके रूप में हुई, क्योंकि वे भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। यह उनके नेतृत्व में बनाया गया एक इतिहास था और देश के लाखों लोगों द्वारा पोषित एक विरासत थी। एक सच्चे राजनेता, लोकतंत्रवादी, आम सहमति बनानेवाले और सबसे बढ़कर वह राजनीति में एक सज्जन पुरुष के रूप में जाने जाते रहे। अटलजी का स्वर्गवास 16 अगस्त, 2018 को 93 वर्ष की आयु में हो गया।

‘कमल संदेश’ अटलजी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है।