रतन टाटा नहीं रहे

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प्रख्यात उद्योगपति श्री रतन टाटा का 09 अक्टूबर, 2024 को देहांत हो गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्री रतन टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि श्री टाटा दूरदर्शी उद्योगपति, दयालु व असाधारण इंसान थे, जिन्होंने अपनी विनम्रता, दयालुता और हमारे समाज को बेहतर बनाने के लिए अटूट प्रतिबद्धता के कारण कई लोगों के बीच अपनी जगह बनाई।

‘एक्स’ पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा, “श्री रतन टाटा जी एक दूरदर्शी उद्योगपति, एक दयालु आत्मा और एक असाधारण इंसान थे। उन्होंने भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानों में से एक को स्थिर नेतृत्व प्रदान किया। साथ ही, उनका योगदान बोर्डरूम से कहीं आगे तक गया। उन्होंने अपनी विनम्रता, दयालुता और हमारे समाज को बेहतर बनाने के लिए एक अटूट प्रतिबद्धता के कारण कई लोगों के बीच अपनी जगह बनाई।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री रतन टाटा जी के सबसे अनोखे पहलुओं में से एक बड़ा सपना देखने और दूसरों को कुछ देने को लेकर उनका जुनून था। वे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, पशु कल्याण जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाने में सबसे आगे थे।

उन्होंने कहा कि मेरा मन श्री रतन टाटा जी के साथ अनगिनत मुलाकातों से भरा हुआ है। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब मैं उनसे अक्सर मिलता था। हम विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते थे। मुझे उनके विचार बहुत समृद्ध करने वाले लगे। मेरे दिल्ली आने के बाद भी बातचीत का सिलसिला जारी रहा। उनके निधन से मैं अत्यंत दु:खी हूं। दु:ख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाए उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।

रतन टाटा जी के निधन से बहुत दु:ख हुआ: जगत प्रकाश नड्डा

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने श्री रतन टाटा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा, “भारतीय उद्योग जगत के शिखर पुरुष और परोपकार के प्रतीक श्री रतन टाटा जी के निधन से बहुत दु:ख हुआ। उद्योग और समाज में उनके उल्लेखनीय योगदान ने हमारे देश और दुनिया पर अमिट छाप छोड़ी है। वह न केवल एक व्यावसायिक आइकन थे, बल्कि विनम्रता, ईमानदारी और करुणा के प्रतीक भी थे। इस भारी क्षति की घड़ी में हम उनके परिवार, मित्रों और उन सभी लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं, जिनके जीवन को उन्होंने स्पर्श किया। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। ओम शांति।”