भूपेश बघेल सरकार के दौरान माओवादी आंदोलन को प्रश्रय मिला : अमित शाह

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    छत्तीसगढ़@25 : शिफ्टिंग द लेंस’ पुस्तक पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 8 फरवरी, 2026 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित ‘छत्तीसगढ़@25: बदलता नजरिया’ पुस्तक कॉन्क्लेव को संबोधित किया। श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की विकास यात्रा, राज्य गठन के ऐतिहासिक संदर्भ, विचारधारा की भूमिका और माओवाद के विरुद्ध चल रहे प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान मंच पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा व अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

श्री शाह ने कहा कि जब श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी देश के प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने यह निर्णय लिया कि छोटे राज्यों का गठन कोई मात्र प्रयोग नहीं, बल्कि वहां की जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति है। यदि इसमें जोखिम भी हो, तो वह जोखिम लेना चाहिए। इसी सोच के साथ एक साथ झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के गठन का निर्णय लिया गया तथा बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का विभाजन हुआ। एक ओर एनडीए सरकार के प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी थे और दूसरी ओर यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे। दोनों कार्यकाल में राज्यों का विभाजन हुआ, जिससे

जब श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी देश के प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने यह निर्णय लिया कि छोटे राज्यों का गठन कोई मात्र प्रयोग नहीं, बल्कि वहां की जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति है। यदि इसमें जोखिम भी हो, तो वह जोखिम लेना चाहिए

यह स्पष्ट होता है कि नेतृत्व की सोच और दृष्टि ही ऐसे निर्णयों को दिशा देती है। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय तीन राज्यों का गठन हुआ, झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़। वहीं डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में आंध्र प्रदेश का विभाजन कर तेलंगाना बनाया गया। अटल जी के समय विधानसभा और लोकसभा दोनों में विभाजन की प्रक्रिया अत्यंत सुचारू रूप से पूरी हुई। बिहार में उस समय उनकी सरकार नहीं थी, फिर भी प्रक्रिया शांति और सहमति से संपन्न हुई तथा नए बने राज्यों के बीच किसी प्रकार का मनमुटाव, बिखराव या खींचतान की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। आज मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दो भाइयों की तरह देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। इसी प्रकार बिहार और झारखंड, तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड भी एक-दूसरे के पूरक के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ की 25 वर्ष की यात्रा को देखें तो 1 नवंबर, 2000 को राज्य की स्थापना हुई। प्रारंभिक वर्षों में कांग्रेस का शासन रहा, जिसके दौरान अत्याचार, दंगे और अनेक आंदोलन देखने को मिले। इसके बाद 15 वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार रही और डॉ. रमन सिंह ने इन वर्षों में विकास के हर आयाम में राज्य को आगे बढ़ाने का कार्य किया। डॉ. रमन सिंह ने माओवादी विचारधारा और नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष किया और यथासंभव उसे नियंत्रित करने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनी, वैसे ही एक भयावह दौर की तरह राज्य के सामने अनेक भ्रष्टाचार के मामले सामने आने लगे। उस समय वे स्वयं कुछ अवधि के लिए गृहमंत्री थे और निस्संकोच कह सकते हैं कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान माओवादी आंदोलन को प्रश्रय मिला।

उन्होंने कहा कि जिनके हाथ में हथियार हों, उन्हें कोई भी शासन कैसे संरक्षण दे सकता है, यह वे आज तक नहीं समझ पाए हैं। डॉ. रमन सिंह द्वारा शुरू किया गया विकास का कार्य और माओवाद को नियंत्रित करने की प्रक्रिया उन पांच वर्षों में ठहराव का शिकार हो गई। उन्होंने कहा कि एक कटु अनुभव के बाद, जिस राज्य की जनता ने तीन बार भाजपा की सरकार चुनी थी, उसने कांग्रेस सरकार को विदाई दे दी। इसके बाद श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पुनः भाजपा सरकार बनी और छत्तीसगढ़ में विकास की नई शुरुआत हुई।

श्री शाह ने कहा कि अब जब लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र माओवाद से मुक्त हो चुका है, तो सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च, 2026 से पहले देश से माओवादी समस्या को जड़ से समाप्त कर दिया जाएगा। यह केवल कानून व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि विचारधारा का प्रश्न है और देश की जनता को इस विचारधारा की वास्तविकता समझनी चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का जो लक्ष्य रखा है, उसमें छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विकसित भारत की दिशा में छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्य बनेगा।