‘विकसित भारत’ के सपनों के शिल्पी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

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     आज जब पूरा राष्ट्र अपने प्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का 75वां जन्मदिवस मना रहा है, उनके ‘विकसित भारत’ की दृष्टि एवं ‘आत्मनिर्भरता’ के मंत्र से सारा देश अनुप्राणित हो रहा है। प्रधानसेवक के रूप में उनका नेतृत्व सुदृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति, अथक परिश्रम, अजेय संकल्प शक्ति के साथ-साथ करिश्मा एवं प्रतिबद्धता का अद्भुत संगम है। पिछले ग्यारह वर्षों से देश ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के सिद्धांतों एवं ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के स्वप्नों को ‘विकास भी, विरासत भी’ के मार्ग से साकार होते देखा है। साथ ही, ‘अमृतकाल’ व्यापक एवं सुव्यवस्थित परिवर्तन के एक ऐसे युग के रूप में सामने आया है जो ‘विकसित भारत’ के पथ को ‘पंच प्रण’ के माध्यम

अपने अथक प्रयासों एवं दूरदृष्टि से आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपने स्वयं के उदाहरण से देश को नई दिशा दिखा रहे हैं। हर विकट परिस्थिति में अदम्य साहस के साथ सामने से नेतृत्च करते हुए उन्होंने जनसेवा के लिए अटूट समर्पण दिखाया है तथा जन-जन में आशा एवं विश्वास की नई चेतना जागृत की है

से प्रशस्त कर रहा है। ‘पंच प्रण’, पांच ऐसे संकल्प हैं जो राष्ट्रीय चेतना को जागृत करते हुए अभूतपूर्व उपलब्धियों से भरे इस यात्रा को नित नई ऊर्जा दे रहे हैं। देश जो 2014 में निराशा एवं नकारात्मकता के दलदल में डूबा हुआ था, आज न केवल विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है बल्कि आने वाले दिनों में एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत एवं निर्णायक नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज विश्व भर में भारत की उपलब्धियों को सराहा एवं स्वीकार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछला ग्यारह वर्ष भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था में व्यापक एवं सकारात्मक परिवर्तन का दौर रहा है। यह काल ‘अंत्योदय’, समाज में खड़े अंतिम व्यक्ति की गरिमा एवं कल्याण से प्रेरित एक नई कार्य-संस्कृति का है। इसका परिणाम यह रहा है कि पीड़ित, वंचित, शोषित एवं समाज के हाशिए पर रह रहे वर्गों के उत्थान तथा महिलाओं एवं युवाओं के लिए असीमित अवसर पैदा हुए हैं। फलतः 25 करोड़ से भी अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आये हैं।

यह जैम त्रिमूर्ति के माध्यम से लाभार्थियों के लिए निर्धारित कल्याण कार्यों में चोरी एवं भ्रष्टाचार पर रोक तथा कल्याणकारी योजनाओं को लक्ष्य आधारित बनाने जैसे अनेक प्रयासों से संभव हुआ है। साथ ही, 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या को निःशुल्क राशन, बड़ी संख्या में गरीब कल्याण की योजनाएं, किसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं कृषि पर केंद्रित विकास कार्यों से चमत्कारिक परिवर्तन हुआ तथा गरीब से गरीब व्यक्ति का सशक्तीकरण हुआ है। प्रधानमंत्री जी, जो स्वयं एक अत्यंत साधारण परिवार से आते हैं, गरीबी के दर्द को अच्छी तरह से समझते हैं। यही कारण है कि वे गरीबी के दंश को दूर करने में सफल रहे एवं इसके विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं। ‘विकसित भारत’ का उनका मिशन आज हर देशवासी की आकांक्षा एवं संकल्प का प्रतीक बन गया है।

आज जब ‘आत्मनिर्भरता’ एवं ‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र भारत की विशाल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आयाम बन गया है, भारत हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है, अपनी सीमाओं को अभेद्य बना रहा है तथा अपने निर्णायक एवं संकल्पशक्ति से परिपूर्ण नेतृत्व के माध्यम से आतंकवाद के विरुद्ध सफलतापूर्वक युद्ध लड़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के दर्शन के अनुरूप भारत आज ‘विश्वमित्र’ के रूप में उभरा है, जिसका उदाहरण कोविड-19 वैश्विक महामारी में देखा गया। अपने अथक प्रयासों एवं दूरदृष्टि से आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपने स्वयं के उदाहरण से देश को नई दिशा दिखा रहे हैं। हर विकट परिस्थिति में अदम्य साहस के साथ सामने से नेतृत्च करते हुए उन्होंने जनसेवा के लिए अटूट समर्पण दिखाया है तथा जन-जन में आशा एवं विश्वास की नई चेतना जागृत की है। उनके प्रेरणादायी एवं ऊर्जावान नेतृत्व में एक ‘नया भारत’ अपने विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध कर रहा है। ‘विकसित भारत’ के मंत्रद्रष्टा के रूप में प्रधानमंत्री श्री मोदी सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर भारत के शिल्पी हैं।
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