‘विकसित भारत’ के विजन के आधार स्तंभ : स्वदेशी व आत्मनिर्भरता

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       राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (रा.स्व.संघ) ने ‘मां भारती’ की सेवा में अपनी सौ वर्षों की गौरवमयी यात्रा पूर्ण कर ली है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के यज्ञ में इसके अद्भुत योगदान की स्मृति में एक डाक टिकट एवं एक सिक्का जारी किया। आज रा.स्व.संघ व्यक्ति निर्माण के साथ-साथ निरंतर विकसित होते हुए विविध आयामों एवं विभिन्न क्षेत्रों में कार्यों के साथ एक अभिनव संगठन के रूप में उभरा है। यह विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन बन गया है जो केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी अनूठी पहचान बना चुका है। स्मृति में डाक टिकट एवं सिक्का जारी करने के अवसर पर प्रधानमंत्री जी ने कहा कि रा.स्व.संघ का आदर्श भारतीय संस्कृति की जड़ों को गहरा एवं सुदृढ़ करना है तथा साथ ही इसने समाज में आत्मविश्वास एवं स्वाभिमान का भाव

स्वदेशी के सिद्धांतों के आधार पर ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान आज देश के कोने-कोने में गूंज रहा है। ‘आत्मनिर्भरता’ के मंत्र से देश में आत्मविश्वास, स्वाभिमान एवं स्व-जागरण का नया युग शुरू हुआ है

भरते हुए हर हृदय में जनसेवा की ज्योति जलाए रखा है। उन्होंने कहा कि इसकी दृष्टि भारतीय समाज को सामाजिक न्याय का प्रतीक बनाना है, इसका मिशन भारत की आवाज को वैश्विक मंचों पर बुलंद करना है। इसका संकल्प राष्ट्र का सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है। रा.स्व.संघ को नि:स्वार्थ सेवा, गरीब से गरीब के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता, हर क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए सतत कार्य तथा समाज में एकता एवं एकात्मता का भाव भरने के लिए जाना जाता है। इसने कोटि-कोटि जन को भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की नींव को सुदृढ़ कर राष्ट्रसेवा के लिए प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रेरित किया है।

स्वदेशी के सिद्धांतों के आधार पर ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान आज देश के कोने-कोने में गूंज रहा है। ‘आत्मनिर्भरता’ के मंत्र से देश में आत्मविश्वास, स्वाभिमान एवं स्व-जागरण का नया युग शुरू हुआ है। भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में रचा-बसा स्वदेशी का आदर्श पिछले ग्यारह वर्षों में आर्थिक सुदृढ़ीकरण एवं वैश्विक स्पर्धा में एक समग्र रणनीति के रूप में विकसित हुआ है। स्वदेशी के उच्च आदर्शों से प्रेरित ‘आत्मनिर्भर भारत’ की पहल आज विनिर्माण, कृषि, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, आयात पर निर्भरता कम करना एवं देशी नवाचार के क्षेत्र को गति दे रही है। प्रधानमंत्री जी का ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान जिससे लोग भारत में बने उत्पाद, जिनसे भारत की मिट्टी की सुगंध आती है, अब खरीद रहे हैं तथा उपयोग में ला रहे हैं। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दृष्टि को बल मिला है और ‘विकसित भारत’ का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 12 मई, 2020 को शुभारंभ किया गया ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ स्वदेशी के सिद्धांतों पर आधारित इसका अधुनिक स्वरूप है जो भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करते हुए इसकी रणनीतिक स्वायत्तता भी अक्षुण्ण रखता है। इस अभियान के अंतर्गत शुरू हुए अनेक पहल के परिणाम अब सामने आ रहे हैं तथा इनसे स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता, जिसे लोग पुरानी बातें कहने लगे थे, इनका महत्व अब स्वीकारने लगे हैं। कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान स्वदेशी की शक्ति को पूरी दुनिया ने देखा, जब भारत न केवल टीके एवं पीपीई किट बनाने में सफल हुआ बल्कि कई देश, जो महामारी से संकटग्रस्त थे, उन्हें भी सहायता कर उबारने में सफल हुआ। जहां पहले स्वदेशी का अर्थ केवल खादी एवं दीया था, आज देश में बने हवाई जहाज तेजस, ब्रह्मोस मिसाईल, टैंक, अत्याधुनिक हथियार एवं ड्रोन्स ने स्वदेशी का अर्थ बदल दिया है। स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता के मंत्र ने पूरे देश में एक नया आत्मविश्वास भर दिया है जिससे अनगिनत नए अवसरों का निर्माण हुआ है तथा चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान प्राप्त किया जा रहा है।

आज जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शासन के प्रमुख के रूप में जनसेवा के पच्चीसवें वर्ष में प्रवेश किया है जन-जन का उनके प्रति दिनोदिन बढ़ता प्यार एवं समर्थन से उनका नेतृत्व और अधिक सुदृढ़ एवं ऊर्जावान बन रहा है। जहां उनके अथक परिश्रम से देशवासियों के जीवन में गुणात्मक सुधार हुए हैं, वहीं ‘विकसित भारत’ एवं ‘आत्मनिर्भरता’ की उनकी दृष्टि से देश का मार्ग उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रशस्त हो रहा है। उनके दूरदर्शी एवं करिश्माई नेतृत्व में भारत एक मजबूत एवं सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरा है।

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