अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के लागू होने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले 11 वर्षों की अभूतपूर्व उपलब्धियों से प्राप्त ‘आत्मविश्वास’ और ‘मजबूती’ के बल पर परिवर्तन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। यह वास्तव में दीपावली का बड़ा उपहार है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से की थी। बीते 11 वर्षों में अनेक ऐतिहासिक सुधार लागू किए गए, जिनके परिणामस्वरूप भारत ने ‘फ्रेज़ाइल फाइव’ से ‘टॉप फाइव’ तक की अद्भुत यात्रा तय की है। आज पूरी दुनिया भारत की बढ़ती ताकत को स्वीकार कर रही है और निराशाजनक वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बीच यह सबसे चमकते सितारे के रूप में उभरा हैं।
विभिन्न अग्रणी सुधारों में ‘जीएसटी’ को एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जिसने ‘एक राष्ट्र, एक कर’ के मंत्र के अंतर्गत भारतीय अर्थव्यवस्था के एकीकरण के सपने को साकार किया है। आयकर में बड़ी राहत के तुरंत बाद लागू किए गए जीएसटी सुधार का सकारात्मक प्रभाव एक नई करदाता-अनुकूल व्यवस्था के रूप में सामने आया है, जिसमें अनुपालन की लागत घटी है और देश की वित्तीय स्थिति और सुदृढ़ हुई है। जीएसटी ने अर्थव्यवस्था में गहरे बदलाव किए हैं- मुद्रास्फीति में कमी, जीडीपी विकास दर में वृद्धि, मांग में तेजी और दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। साथ ही, आम लोगों के लिए कर भार में कमी इसे एक विशेष जन-हितैषी पहल बनाती है। संक्षेप में, जीएसटी ने कर व्यवस्था को सरल बनाकर राष्ट्र को सशक्त किया है और भारत की आर्थिक यात्रा को नई गति प्रदान की है।
अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के लागू होने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले 11 वर्षों की अभूतपूर्व उपलब्धियों से प्राप्त ‘आत्मविश्वास’ और ‘मजबूती’ के बल पर परिवर्तन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है
जीएसटी परिषद् ने अपनी 56वीं बैठक में दर संरचनाओं और प्रक्रियाओं में व्यापक संशोधनों को मंज़ूरी दी है। इसके साथ ही, जीएसटी की दर संरचनाएं मौजूदा चार स्लैब से घटकर दो पर आ गई हैं, जिनकी नई दरें क्रमशः 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत निर्धारित की गई हैं। यह कदम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसके तहत अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लागू करके आम आदमी पर कर का बोझ कम करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। इन सुधारों का मूल उद्देश्य है-‘जीवन को आसान बनाना’ और जन-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को और मजबूत करना है।
इन परिवर्तनों से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशा है। वस्तुओं और सेवाओं की नई जीएसटी दरें 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होंगी। यह कदम अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। नई व्यवस्था में आवश्यक दैनिक वस्तुओं, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर कर का बोझ उल्लेखनीय रूप से कम होगा, जिससे जीवनयापन की लागत घटेगी। सुव्यवस्थित अनुपालन प्रक्रियाएं, स्वचालित पंजीकरण और त्वरित रिफंड व्यवस्था विशेष रूप से एमएसएमई और छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाएंगी। ये सुधार न केवल परिवारों और उद्यमों पर बोझ कम करेंगे, बल्कि भारत की विकास यात्रा को और अधिक गति देंगे। समावेशी उपायों और राजकोषीय विवेकशीलता का संतुलन बनाते हुए यह कदम एक सरल, अधिक कुशल और जन-हितैषी जीएसटी व्यवस्था के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि है।
आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो न केवल पिछली पांच तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि है बल्कि अर्थशास्त्रियों के 6.5–6.7 प्रतिशत के अनुमानों से कहीं अधिक है।
फिच रेटिंग्स, आईएमएफ, ओईसीडी, एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, मॉर्गन स्टेनली और क्रिसिल जैसी अग्रणी वैश्विक एजेंसियों ने भारत की अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक सकारात्मक टिप्पणियां करते हुए अपने आकलनों को पहले से बेहतर किया है। जब 2025 में वैश्विक विकास दर मात्र 3.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, तब भारत की 6.4 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हमारे असाधारण लचीलेपन और मजबूती को रेखांकित करती है। अनुमानों के अनुसार, 2028 तक वैश्विक आर्थिक विकास में भारत का योगदान 20 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा; यह हमारी विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़ती केंद्रीय भूमिका का स्पष्ट संकेत है। यही कारण है कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का कार्यान्वयन एक ऐतिहासिक नीतिगत मील का पत्थर माना जा रहा है। यह सुधार खपत को बढ़ावा देने, कर व्यवस्था को सरल बनाने और आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में निर्णायक कदम है। निस्संदेह, अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत की आर्थिक यात्रा को नई गति प्रदान करेंगे और हमें दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ऐतिहासिक छलांग के लिए तैयार करेंगे।

