आज जब वर्ष 2025 के आरंभ में ही भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 4.3 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया, पिछले दस वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के चमत्कारिक परिवर्तन पर पूरा विश्व अचंभित हो रहा है। भारत, जिसकी जीडीपी में पिछले दस वर्षों में दुगुनी से भी अधिक वृद्धि हुई है, आज विश्व की न केवल सबसे तेज विकास दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है बल्कि इस दशक में सर्वाधिक वृद्धि करने वाली जीडीपी भी बन गई है। देश की जीडीपी जो 2013-2014 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर थी, आज 2025 में 4.3 ट्रिलियन डॉलर की हो गई है। यह 105 प्रतिशत की वृद्धि है जो विश्व की अर्थव्यवस्था में किसी अन्य देश ने प्राप्त नहीं किया है। भारतीय अर्थव्यवस्था, जिसे कांग्रेसनीत यूपीए के दौर में ‘फ्रेजाइल फाइव’ के अंतर्गत गिना जाता था, आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को दूरदर्शी एवं सृदृढ़ नेतृत्व में विश्व के ‘टॉप फाइव अर्थव्यवस्था में शामिल है। इतना ही नहीं, आज भारत विश्व का ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरा है।
जहां अर्थव्यवस्था में दुगुनी से भी अधिक वृद्धि हुई है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था में 2014 से 2024 के मध्य 709.84 बिलियन डॉलर का सीधा निवेश हुआ है। यह कांग्रेसनीत यूपीए के दौर (2004-2014) के दौरान हुए 320 बिलियन डॉलर से 119 प्रतिशत अधिक है। मोदी सरकार के काल में भारत के
मोदी सरकार की अद्भुत आर्थिक उपलब्धियों से सुशासन, वित्तीय अनुशासन एवं अवसंरचना-नीत विकास के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता रेखांकित होती है। देश की जीडीपी दोगुनी से भी अधिक होने से अब यह निश्चित लगता है कि आने वाले दो-तीन वर्षों में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा
निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है जो कांग्रेसनीत यूपीए के दौर के 466 बिलियन डॉलर (2013-2014) से बढ़कर 2023-24 में 778 बिलियन डॉलर हो गई। यह 67 प्रतिशत की वृद्धि है। साथ ही, देश का निर्यात 2020-21 में जीडीपी के 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में जीडीपी का 21.85 प्रतिशत हो गया जो कि कोविड-19 महामारी के पश्चात् अर्थव्यवस्था के पुनः सुदृढ़ीकरण को परिलक्षित करता है। सेवा निर्यात भी 2014-2024 के दौरान दुगुना से भी अधिक होकर 709.84 बिलियन डॉलर हो गया जो कांग्रेस-नीत यूपीए के दौर में केवल 305 बिलियन डॉलर था। यह वृद्धि ‘मेक इन इंडिया’, पीएलआई जैसे योजनाओं के कारण हुआ है जिसने देश की उत्पादन क्षमता तथा वैश्विक स्पर्द्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कोविड-19 महामारी तथा रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आज 2025 में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत अनुमानित है जो कि विश्व की सभी बड़ी अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक है। व्यक्तिगत स्तर पर विकास की द्योतक प्रति व्यक्ति आय भी 2014 के 86,647 रुपए से बढ़कर 2024 में 2.12 लाख रुपए हो चुका है, जो देश के बढ़ते जीवन-स्तर को दर्शाता है। अर्थव्यवस्था में चमत्कारिक परिवर्तन हो रहे हैं, इसका एक व्यापक परिणाम यह है कि 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं तथा अति गरीबी भी 1 प्रतिशत से नीचे आ चुकी है। यह चहुंमुखी परिवर्तन एनडीए शासन ने जनकल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय समावेशन, ग्रामीण विकास तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा में भारी सुधार के कारण संभव हुआ है।
मोदी सरकार की जन-धन योजना के कारण वित्तीय समावेश में व्यापक वृद्धि हुई तथा 53 करोड़ जन-धन बैंक खातों के माध्यम से देश के जन-जन के लिए अभूतपूर्व रूप से बैंकों के दरवाजे खुल गए हैं। जैम त्रिमूर्ति (जन-धन-आधार-मोबाइल) के माध्यम से डाइरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) संभव हुआ है जिसका उदाहरण कोविड-19 महामारी के दौरान सामने आया जब 27,442 करोड़ रुपए 11.42 करोड़ लाभार्थियों को 24 दिनों के अंदर आसानी से हस्तांतरण संभव हुआ। साथ ही, 2012-13 के 2.2 बिलियन डिजिटल लेन-देन के स्थान पर 2024 में 208.5 बिलियन डिजिटल लेन-देन अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ते कदम के उदाहरण हैं।
मोदी सरकार की अद्भुत आर्थिक उपलब्धियों से सुशासन, वित्तीय अनुशासन एवं अवसंरचना-नीत विकास के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता रेखांकित होती है। देश की जीडीपी दोगुनी से भी अधिक होने से अब यह निश्चित लगता है कि आने वाले दो-तीन वर्षों में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व का ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरना ‘विकसित भारत’ के पथ को प्रशस्त कर रहा है।

