मोदी स्टोरी —सीके पटेल, एनआरआई (अमेरिका)
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हमेशा से भारत में एक जीवंत आर्थिक केंद्र स्थापित करने के विचार के पक्ष में रहे हैं, जिसे उन्होंने गुजरात में गिफ्ट सिटी के रूप में साकार किया। उनके एक सहयोगी ने इस परियोजना के लिए एक संदर्भ बिंदु के रूप में 1990 के दशक में उनकी अमेरिका यात्रा का उल्लेख किया।
गुजरात के एक व्यवसायी श्री सी.के. पटेल के अनुसार जब श्री मोदी 1997 में अमेरिका की यात्रा पर गए थे, तो वे लॉस एंजिल्स के केंद्रीय व्यापारिक जिले के बारे में बहुत उत्सुक थे। “एक रात, मैं उन्हें डाउनटाउन लॉस एंजिल्स ले गया। उस सैर के दौरान ‘गिफ्ट सिटी’ के लिए उनके विजन ने आकार लेना शुरू कर दिया था। श्री पटेल बताते है कि जब वह इस क्षेत्र में घूम रहे थे, तो नरेन्द्रभाई ने कहा ‘डाउनटाउन गगनचुंबी इमारतों वाला एक सघन क्षेत्र है। यह वह जगह है जहां अर्थव्यवस्था फलती-फूलती है, जहां बैंक, कॉर्पोरेट कार्यालय एवं बड़े संस्थान शहर को आगे बढ़ाते हैं।”
श्री पटेल के अनुसार श्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका में जो देखा, संभवतः उसी ने गुजरात में गिफ्ट सिटी बनने के लिए उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब वह श्री मोदी के साथ लॉस एंजिल्स में समुद्र तट पर गए, तो श्री मोदी ने ऊंची इमारतें, पर्यटक और चहल-पहल वाले रेस्तरां देखे। उन्होंने पूछा, “हम (गुजरात) इसी तरह क्यों नहीं विकसित हो सकते? वहां भी यहां की तरह विशाल तटरेखा है।”
श्री पटेल ने कहा, “यह देखना दिलचस्प था कि श्री मोदी ने अमेरिका में जो कुछ भी देखा, उसे भारत के संभावित विकास से कैसे जोड़ा। जब भी उन्हें कुछ नया दिखाई देता, तो वह सवाल पूछते और इसे इस बात से जोड़ते कि यह हमारे देश के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है।”
श्री पटेल ने बताया कि इस दौरान जब वह एक बार गाड़ी चला रहे थे, तब एक और घटना हुई। श्री मोदी ने गाड़ी के सड़क किनारे जाने पर एक अजीब सी आवाज सुनी। इस पर उत्सुकता से उन्होंने मुझसे पूछा, “यह आवाज क्या है? यह आवाज उस शोर जैसी है जो आपको पंचर टायर के दौरान सुनाई देती है। ऐसा क्यों हो रहा है?”
श्री पटेल ने कहा, “मैंने उन्हें समझाया कि टायरों में कोई समस्या नहीं है। दरअसल, अमेरिका में सड़कें इस तरह बनाई जाती हैं कि जब वाहन सड़क से उतरने लगते हैं तो वे आवाज करने लगती हैं।” श्री मोदी हमेशा से नई तकनीकों के बारे में बहुत उत्सुक रहे हैं और जानना चाहते थे कि ये सड़कें कैसे बनाई गईं।

