आज जब देश ‘विकसित भारत’ के स्वप्नों को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है, पिछले 11 वर्षों की परिवर्तनकारी यात्रा से पूरे देश में एक नए आत्मविश्वास का निर्माण हुआ है। देश अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा से भरा हुआ है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुदृढ़ एवं दूरदर्शी नेतृत्व में उभरते हुए भारत की चमत्कारिक उपलब्धियों को पूरा विश्व सराह रहा है। आज देश एक मजबूत, निर्णायक एवं दृढ़प्रतिज्ञ नेतृत्व में हर चुनौती को सहजता से अवसर में परिवर्तित कर रहा है। चाहे आतंकी हमला हो या सीमा पार से सैन्य आक्रमण, कोविड-19 वैश्विक महामारी हो या गरीबी के विरुद्ध युद्ध हो, देश ने हर चुनौती के ऊपर विजय प्राप्त की है। ‘फ्रेजाइल फाइव’ से ‘टॉप फाइव’ अर्थव्यवस्था की यात्रा, वह भी विश्व में सबसे अधिक विकास दर के साथ एक ऐसी उपलब्धि है जिससे हर भारतीय गौरव का अनुभव कर रहा है। पिछले ग्यारह वर्ष जनसेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण के प्रति समर्पण के वर्ष रहे हैं। परिणाम एक ऐसे भारत के उद्भव के रूप में देखा जा सकता है जो बड़े स्वप्न देखता है, दूरदर्शिता से ओत-प्रोत है और अपने लक्ष्यों को उच्च कौशल के साथ दृढ़-संकल्पित होकर प्राप्त करता है।
‘फ्रेजाइल फाइव’ से ‘टॉप फाइव’ अर्थव्यवस्था की यात्रा, वह भी विश्व में सबसे अधिक विकास दर के साथ एक ऐसी उपलब्धि है जिससे हर भारतीय गौरव का अनुभव कर रहा है। पिछले ग्यारह वर्ष जनसेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण के प्रति समर्पण के वर्ष रहे हैं
यदि पिछले 11 वर्षों की उपलब्धियों को 2014 के पूर्व की परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाए, तो ये और भी अधिक अद्भुत एवं अकल्पनीय दिखते हैं। कांग्रेसनीत-यूपीए सरकार के एक दशक के कुशासन ने देश के उज्ज्वल एवं विकसित भारत का सपना छीन लिया था। इस काल में व्यापक भ्रष्टाचार, जनता के धन की खुली लूट तथा ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से पंगु शासन व्यवस्था ने भारत की आत्मा पर आघात किए थे। पूरी दुनिया को यह लगने लगा था कि भारत की कहानी अब खत्म होने के कगार पर है तथा देश विश्व के सबसे संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था ‘फ्रेजाइल फाइव’ की श्रेणी में चला गया था। कांग्रेस की घुटना-टेक नीतियों के फलस्वरूप इसके नेतृत्व ने देश की सुरक्षा से शर्मनाक समझौते किए तथा आतंकवादियों, अलगाववादियों एवं उनके समर्थकों को कई प्रकार की छूट देकर तुष्ट करने का प्रयास किया। देश की संप्रभुता, स्वाभिमान एवं स्वतंत्रता पर हुए हर हमले से कांग्रेस का दीन-हीन एवं कमजोर नेतृत्व और भी अधिक बेनकाब हुआ। तुष्टीकरण एवं वोट-बैंक की राजनीति में फंसी हुई कांग्रेस देश के हितों से खिलवाड़ करती रही। यदि कांग्रेस नेतृत्व की पूरी कुंडली का हिसाब लगाया जाए, तो यह कहा जा सकता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इसने देश को जिस दिशा में धकेला, उससे पूरे राष्ट्र के हितों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा तथा देश का मनोबल टूटा।
पिछले 11 वर्षों से भारत न केवल अभूतपूर्व आर्थिक विकास का साक्षात्कार कर रहा है, बल्कि पहली बार एक राष्ट्र के रूप में सभ्यतागत स्वतंत्रता, एकजुटता एवं आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस कर रहा है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र से देश ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को सुदृढ़ कर रहा है। हर क्षेत्र में देश ने चमत्कारिक उपलब्धियों का अंबार लगा दिया है, जिससे भारत की विकास यात्रा आज अन्य देशों के लिए प्रेरणा बन गई है। जब अर्थव्यवस्था आज विश्व में सबसे तेज विकास दर के साथ सशक्त हो रही है, भारत वैश्विक संकट के मध्य एक चमकता हुआ सितारा प्रतीत हो रहा है। इस तेज आर्थिक विकास के कारण 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। बड़ी संख्या में अभिनव योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से किसान, मजदूर, वंचित, पीड़ित, शोषित, गरीब, अनु.जा., अनु.जनजा., पिछड़ा वर्ग, महिला एवं युवा आज भारत के विकास दूत बन गए हैं। अब तक उपेक्षित रक्षा, हरित ऊर्जा, अवसंरचना, शिक्षा एवं कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्र आज विकास एवं प्रगति के पहिए बने हुए हैं। जिसे पहले कमजोरी समझा जाता था आज वह उचित दिशा, मानसिकता एवं जनसेवा के प्रति अटूट निष्ठा के कारण देश की शक्ति बन चुकी है।
पिछले 11 वर्षों में भारत मानो एक लंबी निद्रा से जागा है तथा विश्व के राष्ट्रों के मध्य अपना समुचित स्थान प्राप्त करने के लिए तत्पर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्पित एवं करिश्माई नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की है तथा आज विश्व का ‘ग्रोथ इंजन’ बन गया है। आज देश ‘विकसित भारत’ के स्वप्नों के साथ आगे बढ़ रहा है तथा अमृतकाल के ‘पंच प्रण’ एवं ‘ग्यारह संकल्प’ इसको दिशा दिखा रहे हैं। जहां ‘विकसित भारत’ का स्वप्न विश्व मानवता की सेवा से प्रेरित है, वहीं भारत का उदय विश्व शांति, भाईचारा एवं स्थिरता की गारंटी है।

