‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पूरी दुनिया ने भारतीय सेना के शौर्य एवं पराक्रम को देखा। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुदृढ़ एवं निर्णायक नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लड़ने का पूरे देश का संकल्प और भी अधिक मजबूत हुआ है। आतंकवादी समूहों को उनके घर में ही घुसकर मारने के साथ-साथ भारत ने कड़े राजनयिक एवं आर्थिक कदम उठाए हैं। सिंधु नदी जल समझौते को स्थगित करने के साथ-साथ पाकिस्तान के राजनयिकों को देश से वापस भेजा गया है तथा व्यापार प्रतिबंधित कर दिया गया है। कई देशों के साथ भारत ने वैश्विक कूटनीति के अंतर्गत यह स्पष्ट किया है कि भारत की कार्रवाई न्यायसंगत, सीमित तथा आतंकवादियों पर केंद्रित थी। इससे भारत के पक्ष में वैश्विक समझ और अधिक मजबूत हुई है। भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध संयम और सामर्थ्य, जो सोची समझी सैद्धांतिक प्रत्युत्तर से युक्त सटीक एवं लक्ष्यात्मक था, का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज भारत के आतंकवाद के विरुद्ध लड़ने के संकल्प को विश्व समर्थन दे रहा है और साथ ही सराह भी रहा है।
एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत ने 59 सांसदों की सप्त सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर 32 देशों तथा यूरोपीय यूनियन में भेजा है। ऑपरेशन सिंदूर के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर इन प्रतिनिधिमंडलों ने
भारत ने अपनी संप्रभुता को दृढ़तापूर्वक अक्षुण्ण रखते हुए आतंकवाद के विरुद्ध अपने गैर-समझौतावादी एवं अटल सिद्धांत से पुनः पूरे विश्व को परिचित कराया है
विभिन्न देशों में जाकर पाकिस्तान की आतंकवाद में संलिप्तता के प्रमाण दिए और साथ ही बताया कि भारत की सैन्य कार्रवाई यथोचित एवं आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर केंद्रित रही। साथ ही उन्होंने भारत की कार्रवाई को विधिसम्मत एवं सोच-समझकर लिए गए कदम के रूप में अंतरराष्ट्रीय जगत के समक्ष प्रस्तुत किया है। इन प्रतिनिधिमंडलों ने विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों, सांसदों, चिंतन समूहों एवं संबंधित संस्थाओं से मिलकर भारत के पक्ष को विस्तार से प्रस्तुत किया है। इससे देश में भी विश्वास का वातावरण बना है तथा आतंकवाद के विरुद्ध पूरा देश एकजुट है, उसका संदेश पूरे विश्व में गया है। इससे जनविश्वास एवं राष्ट्रीय मनोबल और अधिक सुदृढ़ हुआ है। चुने हुए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर के साथ-साथ दूसरे देशों को विश्वास में लेने का परिपक्व राजनैतिक कौशल की भारत की संतुलित नीति को हर ओर सराहा जा रहा है।
देश द्वारा भेजे गए प्रतिनिधिमंडलों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने न केवल आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की बल्कि अपार धैर्य का प्रदर्शन किया। यह जगजाहिर है कि पाकिस्तान का आतंकवादियों को समर्थन, प्रशिक्षण, हर प्रकार का सहयोग तथा दूसरे देशों में उन्हें भेजने का लंबा इतिहास रहा है। इसके बाद भी भारत ने असीम संयम का परिचय दिया है। फ्रांस, इटली, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका एवं यूएई जैसे देशों ने भारत के पक्ष को समझते हुए सहयोगपूर्ण वक्तव्य दिए हैं। किसी भी बड़े देश ने भारत के पक्ष से असहमति व्यक्त नहीं की है, जिससे भारत द्वारा भेजे गए संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की प्रभावशीलता का पता चलता है। त्रिनिडाड एवं टाबैगो, फिजी एवं गुयाना जैसे देशों में जहां बड़ी संख्या में भारतवंशी रहते हैं, ने खुलकर भारत के पक्ष का समर्थन किया है तथा मोदी सरकार के सक्रिय रूप से सभी देशों से संवाद स्थापित करने के प्रयास को सराहा है। खुफिया जानकारी साझा करने, आतंकियों के प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता को रोकने के इन देशों के साथ मजबूत आतंकवाद विरोधी सहयोग एवं समझ का निर्माण हुआ है। पाकिस्तान द्वारा इस विषय के अंतरराष्ट्रीयकरण के प्रयास पूरी तरह से विफल हुए, क्योंकि पाकिस्तान का आतंकवाद के साथ नापाक गठजोड़ से पूरा विश्व अवगत है। इन कूटनीतिक प्रयासों से जहां पूरे विश्व में भारत के आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई को समर्थन मिला है, वहीं पाकिस्तान अलग-थलग पड़ चुका है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से एक ‘न्यूनॉर्मल’ स्थापित हुआ है। अब भारत आतंकवाद के विरुद्ध बिना पाकिस्तान से युद्ध घोषित किए सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इससे यह भी स्पष्ट है कि पाकिस्तान का परमाणु ब्लैकमेल अब भारतीय सैन्य कार्रवाई को रोक नहीं सकता। इन प्रतिनिधिमंडलों ने सफलतापूर्वक भारत के इस सिद्धांत को सुदृढ़ किया है तथा यह प्रमाणित किया है कि भारत यदि निर्णायक रूप से कदम बढ़ाए, तब विश्व अभिमत को कूटनीतिक तरीके से बिना अलग-थलग पड़े, विश्वसनीयता के साथ अपने पक्ष में मोड़ सकता है। जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि टेरर, टॉक और ट्रेड न एक साथ चल सकता है, न ही पानी और खून एक साथ बह सकता है। वास्तव में, भारत ने अपनी संप्रभुता को दृढ़तापूर्वक अक्षुण्ण रखते हुए आतंकवाद के विरुद्ध अपने गैर-समझौतावादी एवं अटल सिद्धांत से पुनः पूरे विश्व को परिचित कराया है।
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