राष्ट्र आतंकवाद के खिलाफ एकजुट खड़ा है

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     जम्मू-कश्मीर में पहलगाम के पास वैसरन घाटी में हुए कायरतापूर्ण आंतकी हमले की पूरे विश्व में कड़ी भर्त्सना हुई है। यह न केवल आतंकियों द्वारा अत्यंत नीचतापूर्ण कृत्य है बल्कि पूरी मानवता के विरुद्ध एक घृणास्पद अपराध है। निर्दोष पर्यटकों को धर्म के आधार पर चुन-चुन कर निशाना बनाना एक बार पुनः आतंकियों के भयानक चेहरे एवं कुत्सित इरादे को दर्शाता है, जिसे कोई भी सभ्य समाज सहन नहीं कर सकता। जहां सुरक्षा बलों ने पूरे जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के ठिकानों को निशाने पर लेते हुए तलाशी अभियान शुरू किया है, एक राष्ट्र के रूप में आतंकवाद से लड़ने का भारत का संकल्प और अधिक मजबूत हुआ है। पूरा देश इस निंदनीय हमले में प्राण गंवाने वाले बलिदानी एवं उनके परिवारों के साथ आज एकजुट खड़ा है। इस नृशंस हमले के पीछे के आतंकियों के प्रति ‘कड़ी कार्रवाई’ के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के साथ संपूर्ण राष्ट्र आज आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट खड़ा है।

ध्यान देने योग्य है कि जम्मू-कश्मीर जो पूर्व में पूरी तरह से आतंकवाद से त्रस्त था, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुदृढ़ एवं ऊर्जावान नेतृत्व में 2014 से व्यापक परिवर्तन का साक्षी रहा है। पिछले दशक में मोदी सरकार ने सक्रियतापूर्ण सैन्य कार्यवाहियों, पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर अलग-थलग कर

पहलगाम नृशंस हमले के पीछे के आतंकियों के प्रति ‘कड़ी कार्रवाई’ के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के साथ संपूर्ण राष्ट्र आज आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट खड़ा है

तथा बड़े संवैधानिक सुधारों द्वारा जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद एवं कुव्यवस्था से निकालकर एक सुस्थिर एवं विकासोन्मुखी क्षेत्र बना दिया है। पत्थरबाजी, बमबाजी एवं आतंकवाद के काले दिन लगभग समाप्त हो चुके हैं। कश्मीर में आम जन की हिंसक घटनाओं में मृत्यु अब 81 प्रतिशत कम हो गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निरंतर प्रयासों के कारण आतंकवादी संबंधी गतिविधियों में 71 प्रतिशत कमी, सामान्यजन की मृत्यु में 81 प्रतिशत तथा सैन्य बलों की क्षति में 48 प्रतिशत की कमी हुई है। जम्मू-कश्मीर में 2006 से 2013 के मध्य 4,766 आतंकी घटनाएं रिकॉर्ड की गई थीं। 2010 में 6,235 आमजन पत्थरबाजी में घायल हुए जिसकी संख्या अब शून्य है। मोदी सरकार ने आतंकवाद को कड़ा जवाब दिया, जबकि ठीक इसके विपरीत कांग्रेसनीत यूपीए काल में 2004 से 2014 के बीच 6,000 लोग आतंकवाद के भेंट चढ़ गए। 2014 से अब तक पूरे देश में आतंकवादी घटनाओं में 81 प्रतिशत कमी आयी है। 2010 में 1,936 घटनाएं हुई थीं, जिसकी संख्या 2024 में मात्र 374 है और इसका सबसे अधिक लाभ जम्मू-कश्मीर को मिला है। इस व्यापक परिवर्तन में धारा-370 के निरस्तीकरण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे घाटी में शांति एवं सुरक्षा तो स्थापित हुई ही, साथ ही जमीनी स्तर पर जन-जन की भागीदारी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हुई है। जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार के साथ-साथ पंचायत एवं नगरपालिका स्तर पर 36,000 से भी अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि आज अपने अधिकारों का उपयोग कर जनता का सशक्तीकरण कर रहे हैं। इससे ग्रास-रूट स्तर पर लोकतंत्र अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ हुआ है। यही कारण है कि आतंकी समूह और सीमापार के उनके सहयोगी के हाथ-पैर फूल गए हैं एवं वे लगातार क्षेत्र की शांति एवं सुरक्षा को भंग करने का कुप्रयास कर रहे हैं।

पहलगाम में हुए अत्यंत घृणित आतंकी हमले के प्रत्युत्तर में मोदी सरकार ने तीव्रता से कार्रवाई करते हुए सिंधु जल समझौते को 23 अप्रैल, 2025 से रोक दिया है। इससे पाकिस्तान पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। साथ ही, कई स्तर पर राजनयिक कदम उठाये जा रहे हैं। पाकिस्तानी नागरिकों के सभी वीजा सेवा रद्द कर दी गई है तथा भारत में रह रहे पाकिस्तानी सैन्य राजनयिकों को एक सप्ताह के भीतर भारत छोड़ने को कहा गया है। पाकिस्तान की मुख्य सीमा बंद कर दी गई है तथा पाकिस्तानी राजनयिकों की संख्या में भारी कमी की गई है। प्रोपगेंडा एवं भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने के लिए 16 पाकिस्तानी यू-ट्यूब चैनल तथा डॉन न्यूज एवं जियो न्यूज को प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र है जो आतंकियों को प्रशिक्षित कर हथियार देकर विश्व के दूसरे देशों में निर्यात करता है। यह पूरी दुनिया के आतंकियों के लिए एक सुरक्षित शरण-स्थली बन चुका है। आज जब भारत देश के भीतर एवं बाहर दोनों ओर आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहा है तथा हर वैश्विक मंच पर अपनी आवाज उठा रहा है, अब समय आ गया है कि पूरा विश्व आंतकवाद के खात्मे के लिए एकजुट हो जाए।

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