‘राष्ट्र जीएसटी व्यवस्था में सुधार के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी को धन्यवाद देता है’

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 07 सितंबर, 2025 को भाजपा संसदीय दल की कार्यशाला में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों पर प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जो सर्वसम्मति से पारित हुआ

‘कर व्यवस्था’ किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदु होती है। हालांकि, किसी भी सरकार की असली परीक्षा एक ऐसी कर व्यवस्था विकसित करने में होती है जो उत्पादन को बढ़ावा दे, खपत को प्रोत्साहित करे और साथ ही देश के कोष में उल्लेखनीय वृद्धि करे। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में हाल ही में शुरू किए गए जीएसटी के सुधारों में सभी प्रमुख उद्देश्यों को प्राप्त करने की क्षमता है। इसके लिए हम उनका हार्दिक अभिनंदन करते हैं।

भाजपा सांसदों की यह सभा प्रधानमंत्री जी को इस साहसिक एवं आम जनता के लिए उठाए गए कदम के लिए हार्दिक बधाई देती है और जनता की ओर से आभार व्यक्त करती है।

आठ साल पहले माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी एवं निर्णायक नेतृत्व में भारत ने ‘एक राष्ट्र, एक कर’ के दृष्टिकोण को साकार करते हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को अपनाया। इसके पश्चात्, वैट एवं अनेक करों की जटिल व्यवस्था जिसने हमारी अर्थव्यवस्था को धीमी एवं खंडित कर रखी थी, राज्यों के बीच टोल बूथों को अनंत कतारों में जकड़ा हुआ था, अब वह पूरी तरह एक सुव्यवस्थित कर ढांचे और एकीकृत बाजार में बदल चुकी है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था में न्यायसंगत, सरल एवं सुदृढ़ बना दिया है। 2014 से पहले सरकारें जीएसटी लागू करने में असफल रहीं, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल जीएसटी लागू किया, बल्कि पूरे देश की सर्वसम्मति से इसे स्थापित भी किया।

केवल 8 वर्षों में जीएसटी करदाताओं का आधार 2017 के 66 लाख से दोगुने से भी अधिक बढ़कर 1.5 करोड़ से अधिक हो गया है और वार्षिक कर संग्रह 18 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। जीएसटी संग्रह अब लगभग 2 लाख करोड़ रुपये प्रति माह तक पहुंच गया है, जो इस ऐतिहासिक सुधार के लागू होने के समय की तुलना में बहुत अधिक है। ‘डेलॉइट’ के एक सर्वेक्षण से पुष्टि होती है कि एमएसएमई सहित 85 प्रतिशत व्यवसाय जीएसटी से संतुष्ट हैं।

प्रधानमंत्री जी के दृढ़ विश्वास से प्रेरित इस सुधार के अगले चरण ने अब कर व्यवस्था को और सरल बना दिया है। इस पूरे प्रयास में आम लोगों को केंद्र में रखा गया है। खाद्य एवं दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दरें कम की गई हैं, इनवर्टेड टैक्स जैसी विकृतियों को दूर किया जा रहा है और छोटे व्यवसायों, निर्यातकों एवं स्टार्टअप्स के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है।

ये सुधार नागरिकों के जीवन को आसान बनाने, व्यापारियों को सशक्त बनाने और भारत को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ाने के हमारी सरकार के दृढ़ संकल्पों को दर्शाते हैं। मासिक संग्रह में लगातार वृद्धि (2 लाख करोड़ रुपये), अधिक अनुपालन का एक निश्चित संकेत है। यह अर्थव्यवस्था में तेजी का भी संकेत है।

इसलिए, यह प्रस्ताव बड़े और छोटे सभी उत्पादकों/व्यापारियों से आह्वान करता है कि वे यह सुनिश्चित करने प्रयास करें कि छूट और रियायतों का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचें। हर बचत और हर राहत को ग्राहकों तक पहुंचाकर हम प्रधानमंत्री जी के दृष्टिकोण को आगे ले जाने में सहयोग करेंगे और साथ ही दुकानदार एवं ग्राहक, व्यापारी एवं नागरिकों के बीच विश्वास भी बढ़ेगा। कम कीमतें मांग को बढ़ावा देंगी, मांग बढ़ने से व्यवसायों में तेजी आएगी तथा यह समृद्धि राष्ट्र की शक्ति को और मजबूती प्रदान करेगी।

आइए, हम यह सुनिश्चित करें कि श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जीएसटी सुधारों को सुशासन की जीत और भारत की जनता से किए गए वादे के रूप में याद किया जाए। ये दूरगामी बदलाव हमारी एकता, निष्पक्षता और साझा विकास के प्रतीक हैं। अब प्रत्येक व्यापारी का कर्तव्य है कि वह राहत का एक-एक रुपया उपभोक्ता तक पहुंचाए, जिससे इन सुधारों को जीवन-जीने में आसानी, बढ़ती मांग और अधिक समृद्ध अर्थव्यवस्था में बदला जा सके। यह मोदी सरकार का आह्वान है। यह न्यायसंगत विकास और भारत के प्रत्येक परिवार को इसका लाभ दिलाने का आह्वान है। यह एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आह्वान है।